Chaibasa News : कोल्हान में मानकी-मुंडा स्वशासन प्रणाली सशक्त

केंद्र सरकार के निर्देश पर जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा (1 से 15 नवंबर) पूरे देश में उत्साहपूर्वक मनाया जा रहा है

चक्रधरपुर.

केंद्र सरकार के निर्देश पर जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा (1 से 15 नवंबर) पूरे देश में उत्साहपूर्वक मनाया जा रहा है. यह आयोजन झारखंड स्थापना दिवस और धरती आबा बिरसा मुंडा के जन्मदिवस (15 नवंबर) तक चलेगा. इसी क्रम में पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, चक्रधरपुर में गुरुवार को विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास और योगदान पर चर्चा हुई. कार्यक्रम का संयोजन शिक्षक नील अभिमन्यु ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक विश्वनाथ हांसदा की अनुमति से किया. इस अवसर पर चक्रधरपुर के युवा समाजसेवी एवं साहित्यकार रबिन्द्र गिलुवा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे. विद्यालय परिवार ने उन्हें पौधा भेंट कर सम्मानित किया.

प्रकृति के रक्षक हैं आदिवासी

रवींद्र गिलुवा ने हो आदिवासियों के इतिहास, संस्कृति और स्वशासन प्रणाली पर विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सिंहभूम (कोल्हान) की धरती लगभग 3.6 अरब वर्ष पुरानी है, जो विश्व की प्राचीनतम भू-भागों में से एक है. उन्होंने कहा कि हो समाज की मानकी-मुंडा स्वशासन प्रणाली इतनी सशक्त रही कि कोई बाहरी शासक कोल्हान पर कभी पूर्ण नियंत्रण नहीं कर सका. गिलुवा ने 1820-21 के हो विद्रोह, 1831-32 के कोल विद्रोह, 1958 के जनआंदोलन और 1980 के गुवा गोलीकांड जैसे ऐतिहासिक संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा आदिवासी जीवन का मूल सिद्धांत रहा है. उन्होंने बताया कि आदिवासी समुदाय प्रकृति के साथ सामंजस्य में जीवन व्यतीत करता है. कार्यक्रम के अंत में प्रधानाध्यापक विश्वनाथ हांसदा ने मुख्य वक्ता रवींद्र गिलुवा को धन्यवाद ज्ञापित किया और विद्यार्थियों से अपने पूर्वजों के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया.

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Author: AKASH

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