Chaibasa News : गैस की किल्लत से संकट में होटल व्यवसाय

चाईबासा : होटलों के मेन्यू में 80% की कटौती

चाईबासा. पिछले 37 दिनों से जारी ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के वैश्विक असर ने अब स्थानीय स्तर पर रसोई और व्यापार की कमर तोड़ दी है. गैस सिलेंडर की भारी किल्लत के कारण ग्राहकों में पैनिक की स्थिति बनी हुई है. हालांकि, गैस एजेंसी संचालकों का दावा है कि स्थिति अब धीरे-धीरे नियंत्रण में आ रही है, लेकिन धरातल पर होटल और ढाबा संचालकों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं.

ठप होने की कगार पर छोटे होटल :

कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की अनुपलब्धता ने सबसे ज्यादा छोटे होटल संचालकों को प्रभावित किया है. कई दुकानें ठप होने की कगार पर हैं. वहीं, मध्यम और बड़े होटलों ने इंडक्शन, लकड़ी, कोयला और गुल के भरोसे किसी तरह अपना काम चालू रखा है. स्थिति यह है कि गैस के अभाव में होटलों को अपने मेन्यू में 70 से 80 फीसदी तक की कटौती करनी पड़ी है. मनपसंद डिसेज न मिलने के कारण ग्राहकों ने भी होटलों से दूरी बना ली है, जिससे संचालकों की कमाई पर भारी बट्टा लग रहा है.

धुएं और महंगाई की दोहरी मार

होटल और ढाबा मालिकों को न केवल कॉमर्शियल गैस के लिए भटकना पड़ रहा है, बल्कि महंगे कोयले और लकड़ी के जुगाड़ के लिए सुबह से ही मशक्कत करनी पड़ रही है. एक संचालक ने व्यथा सुनाते हुए कहा कि सुबह से शाम तक ईंधन के लिए दौड़ना पड़ता है. ऊपर से जब होटल धुएं से भर जाता है, तो इस व्यवसाय को छोड़ने का मन करने लगता है. कमोबेश यही हाल घरेलू उपभोक्ताओं का भी है. आम कनेक्शन धारकों को बुकिंग के 35 दिन बाद ओटीपी मिल रहा है, जबकि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सिलेंडर के लिए 45 दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है.

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Author: ATUL PATHAK

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