चाईबासा.
अखिल भारतीय क्रांतिकारी आदिवासी महासभा ने विकास के नाम पर आदिवासी इलाके में बिना ग्रामसभा किये ही आदिवासियों की जमीन अधिग्रहण के खिलाफ मंगलवार को शहर में जुलूस निकाला. इसके साथ ही नंग-धड़ंग प्रदर्शन भी किया. यह जुलूस गांधी मैदान से सदर थाना, सदर बाजार और कचहरी रोड तक गया. इसके बाद अनुमंडल कार्यालय के पास सभा में तब्दील हो गयी. इसके साथ ही उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति, राज्यपाल को मांगपत्र भी सौंपा गया.30 गांव को जोड़ते हुए रिंग रोड बनाया जा रहा:
जॉन मिरन मुंडा ने कहा कि चाईबासा के 30 गांव को जोड़ते हुए रिंग रोड बनाया जा रहा है. एनएच-75ई चाईबासा से हाटगम्हरिया रोड पर चार जगहों पर आरओबी बनाया जा रहा है. ये दो योजना बिना ग्रामसभा के हो रही हैं. उसका मुआवजा भी काफी कम है. भारत के संविधान में कुल 12 अनुच्छेद हैं. इसमें पांचवीं अनुसूची में आदिवासी इलाका में विकास योजना व शासन और प्रशासन को लेकर राष्ट्रपति और राज्यपाल को है. यहां टाटा-रुंगटा जैसी कंपनी के मालिक अरब-खरबपति हो गये हैं, लेकिन यहां के लोगों का विकास नहीं हुआ है.प्रावधान के अनुसार ही जमीन अधिग्रहण हो:
आजादी के 78 साल बाद भी यहां विकास नहीं हो पाया है. उन्होंने कहा कि हमारी जमीन लीजिये, लेकिन संविधान का जो प्रावधान है, उसका अधिकार हमें मिलना चाहिए. संविधान में जो समता जजमेंट का प्रावधान है, उसका अनुपालन होना चाहिए था वह नहीं हुआ. जमीन अधिग्रहण ग्रामसभा के माध्यम से होना चाहिए. इसलिए हमलोग अपनी बात को राज्यपाल तक पहुंचाना चाहते हैं. बिस्टमपुर, जोड़ापोखर, तालाबुरु व इलीगढ़ा गांव के बीचोंबीच आरओबी का निर्माण किया जा रहा है. इससे कई घर टूट जायेंगे. धरना प्रदर्शन में जिप सदस्य मानसिंह तिरिया, सुनील गगराई, चुम्बरू पिंगुवा, लादूरा मुंडा, प्रेम सिंह हेंब्रम, मेरी देवगम, सरस्वती सवैंया आदि मौजूद थीं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
