चाईबासा. खूंटपानी प्रखंड के उलीराजाबासा गांव स्थित मुंडासाई टोला में मंगलवार को विशेष बैठक हुई. इसकी अध्यक्षता राजाबासा पीढ के मानकी लक्ष्मण बानरा ने की. बैठक में उलीराजाबासा समेत आसपास के पांच गांवों में एक साथ 18 अप्रैल 2025 को मागे पर्व मनाने का निर्णय हुआ. दोपहर में उलीराजाबासा स्थित जाहेरथान (देशाउली) में दियुरी बोंगाबुरू (पूजा-पाठ) करेंगे. ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि मागे पर्व में आदिवासी वाद्ययंत्रों व गीत बजेंगे. अन्य समुदाय के गीत-संगीत बजाने पर पाबंदी रहेगी. पूजा स्थल पर आदिवासी पारंपरिक पोशाक और परिधान में शामिल होंगे. मागे पर्व उलीराजाबासा, गाड़ाराजाबासा, किताहातु, टोटरोगुटु व गालूबासा में एक साथ मनाया जायेगा. पर्व के अंतिम दिन खेलकूद प्रतियोगिता होगी.
सृष्टि का पर्व के रूप में मनाते हैं मार्ग पर्व : दिउरी
दिउरी नोके बानरा ने बताया कि हो जनजाति में मागे पर्व को सृष्टि का पर्व के रूप में मनाया जाता है. करन बानरा ने कहा कि आज युवक-युवती अपने गांव-घर से दूर रहकर शहरों के विभिन्न कॉलेजों में युवक-युवतियां पढ़ाई कर रहे हैं. वे अपने पारंपरिक त्योहार, संस्कृति व नियम दस्तूर से दूर होते जा रहे हैं. हो जनजाति के बच्चे अपनी सभ्यता, संस्कृति और पर्व-त्योहारो को न भूलें. मागे पर्व में पूजा-पाठ कर अच्छी बारिश व फसल होने, लोगों की सुख-समुद्धि व आपदाओं से सुरक्षा के लिए देशाउली में बोंगा बुरू करते हैं. मौके पर दीकु बानरा, हीरो बानरा, बागान बानरा, सलीम बानरा, रामसिंह बानरा, सुरसिंह बानरा, मिरन बानरा, पासिंह बानरा समेत ग्रामीण उपस्थित थे.
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