बंदगांव : कराइकेला साहू टोला में सोमवार को सांप से रक्षा के लिये ग्रामीणों ने मां मनसा की पूजा-अर्चना की. इस दौरान पंडित चमटु मिश्र ने सीजू पेड़ के नीचे विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं परिवारों की मंगलकामना की. पूजा को लेकर बड़ी संख्या में महिलाओं ने व्रत रखा. विधि-विधान से मां मनसा की पूजा-अर्चना की.
परिवार की खुशहाली की कामना
श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की. वहीं, मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालुओं ने धार्मिक परंपरा के अनुसार बत्तख की बलि देकर पूजा संपन्न की. पूजा में शामिल महिलाओं ने बताया कि मां मनसा पूजा की यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है. श्रद्धालु हर वर्ष पूरी आस्था और उत्साह के साथ इस परंपरा का निर्वहन करते हैं.
ग्रामीण साल में चार बार करते हैं मां मनसा की पूजा
ग्रामीणों के अनुसार, अलग-अलग संक्रांति के अवसर पर एक साल में चार बार मां मनसा पूजा का आयोजन किया जाता है. सोमवार को आयोजित पूजा इस वर्ष की पहली मां मनसा पूजा थी. पूजा के दौरान साहू टोला में श्रद्धा और उत्साह का माहौल रहा. बड़ी संख्या में महिलाओं एवं श्रद्धालुओं ने पूजा में शामिल होकर मां मनसा से परिवार एवं क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की.
क्या है मान्यता
मां मनसा की पूजा सर्पों और विष से रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजे जाने से जुड़ी है. पूर्वी भारत, खासकर झारखंड, बंगाल और आसपास के क्षेत्रों में बारिश के मौसम में मनसा पूजा का विशेष महत्व है. लोकमान्यता है कि मां मनसा की पूजा करने से परिवार को विषधर सांपों और सर्पदंश के भय से रक्षा मिलती है. घर में सुख-समृद्धि और संतान की खुशहाली बनी रहती है. मां मनसा को कई स्थानों पर ‘विषहरी’ के नाम से भी जाना जाता है. मनसा पूजा से जुड़ी लोककथाओं में चांद सौदागर, लखिंदर और बेहुला की कथा प्रमुख है. माना जाता है कि चांद सौदागर द्वारा मां मनसा की पूजा स्वीकार करने के बाद देवी की महिमा स्थापित हुई. इसी आस्था और लोकपरंपरा के कारण गांवों में आज भी मनसा पूजा बड़े उत्साह से आयोजित की जाती है और मनसा मंगल का गायन भी होता है.
