गोइलकेरा. छठ महापर्व की तैयारियों के बीच गोइलकेरा का एकमात्र छठ घाट आज भी उपेक्षा की मार झेल रहा है. जहां आसपास के इलाकों में घाटों की साफ-सफाई जोरों पर है, वहीं गोइलकेरा के इस पुराने तालाब की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है. यह तालाब न केवल छठ पूजा का प्रमुख स्थल है, बल्कि मूर्ति विसर्जन जैसे सामाजिक-धार्मिक कार्यों का भी केंद्र रहा है. फिलहाल पूरा तालाब जलकुंभी से भर गया है. पानी का अधिकतर भाग उपयोग योग्य नहीं बचा है. दुर्गा पूजा के दौरान थोड़ी सफाई करवाई गयी थी, लेकिन वह पर्याप्त नहीं रही. स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब के पानी में नहाने से खुजली जैसी समस्याएं हो रही हैं. छठ पर्व के केवल दो दिन शेष रहते भी प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी घाट की सफाई कार्य से नदारद हैं. गुरुवार की शाम स्वयं व्रतियों के परिजन घाट पहुंचे, परंतु अपनी मेहनत के बावजूद जलकुंभी साफ नहीं कर पाये. लोगों की मांग है कि प्रशासन शीघ्र संज्ञान ले और तालाब को साफ करवाकर श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और स्वच्छ जल उपलब्ध कराए, ताकि आगामी 25 अक्तूबर से शुरू हो रहे छठ पर्व की तैयारी पूर्ण श्रद्धा और स्वच्छता के साथ हो सके.
दंदासाई छठ घाट की सफाई शुरू
चक्रधरपुर. छठ महापर्व को लेकर गुरुवार को चक्रधरपुर वार्ड संख्या पांच स्थित दंदासाई नदी घाट की सफाई शुरू की गयी. छठ पूजा समिति के सलाहकार राजू प्रसाद कसेरा ने जेसीबी की मदद से सफाई की. वहीं नगर परिषद की ओर से रास्तों का सफाई कार्य जारी है. श्री कसेरा ने कहा कि 25 अक्तूबर को सफाई कार्य पूरा हो जायेगा. इसके बाद विद्युत सज्जा का कार्य होगा. व्रती व श्रद्धालुओं को परेशानी न हो, इसका विशेष ख्याल रखा जायेगा. मौके पर कमेटी के सलाहकार राजेश शुक्ला, अरुण साव, भरत सिंह, आशीष वर्मा आदि मौजूद थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
