Chaibasa News : चक्रधरपुर में 1896 में बना था लाल गिरजाघर

लाल गिरजाघर का रंग रोगन शुरू, क्रिसमस के दिन होगी विशेष प्रार्थना सभा

चक्रधरपुर. चक्रधरपुर नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में क्रिसमस की तैयारियां शुरू हो गयी हैं. वहीं संडे के दिन चर्चों में क्रिसमस गैदरिंग कार्यक्रम भी शुरू हो गया है. चर्चों की साफ-सफाई और रंग-रोगन किये जा रहे हैं. चक्रधरपुर नगर के पोटका स्थित लाल गिरजाघर में भी क्रिसमस पर बड़ी संख्या में मसीही समाज के लोग प्रार्थना के लिए पहुंचते हैं. लाल गिरजाघर की स्थापना वर्ष 1896 में हुई थी. ब्रिटिश काल में चक्रधरपुर में मसीही समुदाय के लोगों को प्रार्थना करने के लिए होने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए चक्रधरपुर के पोटका में लाल गिरजाघर की स्थापना की गयी थी. होली सेविवर चर्च लाल गिरजाघर की आधारशिला उस वक्त के चाईबासा के पादरी लोग्सडेल ने रखी थी.जानकार बताते हैं कि वर्ष 1892-93 में पादरी लोग्सडेल चाईबासा से चक्रधरपुर रेलवे कर्मचारियों के लिए आराधना करने महीने में एक बार आया करते थे. उस वक्त गिरजाघर नहीं होने के कारण आराधना कभी रेलवे स्टेशन मास्टर के कार्यालय, वेटिंग रूम या कभी पोटका के डाकबंगले में की जाती थी. इसी कठिनाई को दूर करने के लिए पादरी लोग्सडेल ने वर्ष 1893 के मई में मिशन हाते की जमीन खरीदी और अस्थायी गिरजाघर और विश्रामगृह बनवाना आरंभ किया. उस वक्त चक्रधरपुर का लाल गिरजाघर छह हजार रुपये में बनकर तैयार हुआ था. पादरी 1894 में गिरजाघर की नींव रखी, जो 1896 में तैयार हो गया. 20 सितंबर 1896 को आराधना के लिए गिरजाघर खोल दिया गया.

रेलकर्मियों के लिए बना था गिरजाघर :

लाल गिरजाघर खासकर एंग्लो इंडियन तथा यूरोपयिन ईसाई रेलकर्मियों के लिए बना था. आरंभ में लोगों के बीच धर्म प्रचार करने की ओर ध्यान नहीं दिया गया. उस वक्त स्थायी रूप से यहां पादरी या प्रचारक नहीं रहा करते थे. आरंभ में स्वयं पादरी लोग्सडेल महीने में एक बार यहां आते थे. बाद में मनोहरपुर, मुरहू व आद्रा से यहां पादरी आने लगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >