चाईबासा. चाईबासा के मंगलाहाट में बाजार शुल्क की वसूली को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. हाट ठेकेदार गंगा प्रसाद गुप्ता पर जबरन बाजार शुल्क मांगने का आरोप लगाते हुए खुदरा सब्जी विक्रेता संघ ने नाराजगी जतायी है. बुधवार को मंगलाहाट परिसर में आयोजित प्रेसवार्ता में संघ के सचिव संतोष कुमार दे ने ठेकेदार की कार्यशैली पर सवाल उठाए.
2015 में ही समाप्त हो चुका है बाजार शुल्क
संतोष कुमार दे ने कहा कि कृषि उत्पादन बाजार समिति के माध्यम से वर्ष 2015 में पूरे झारखंड में बाजार शुल्क समाप्त कर दिया गया था. वर्तमान में केवल भूमि कर लागू है, जिसके तहत प्रति सब्जी दुकान 30 रुपये निर्धारित है. इसके बावजूद ठेकेदार द्वारा प्रति दुकान 50 रुपये भूमि कर, प्रति बोरा 20 रुपये और प्रति कैरेट 5 रुपये बाजार शुल्क की मांग की जा रही है, जो पूरी तरह गलत और अवैध है. कहा कि वर्ष 2025 में संघ ने 10 रुपये की बढ़ोतरी स्वीकार की थी, लेकिन बिना टेंडर प्रक्रिया के ही दो वर्षों के लिए 2028 तक ठेका दे दिया गया, जो गैर-संवैधानिक है.
बुनियादी सुविधाओं का अभाव, फिर भी बढ़ी वसूली
संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि बाजार में वर्षों से गंदगी का अंबार लगा है. महिला एवं पुरुष शौचालय की व्यवस्था नहीं है, पेयजल की सुविधा नहीं है, सड़क जर्जर है और जल निकासी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है. इसके अलावा लाइट और पार्किंग की भी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. ऐसे हालात में अतिरिक्त शुल्क की मांग करना अनुचित है. संघ ने उपायुक्त से संवैधानिक तरीके से टेंडर प्रक्रिया कराने और तत्काल प्रभाव से वर्तमान ठेका रद्द करने की मांग करने की बात कही है. प्रेस वार्ता में सूरजमल गुप्ता, मिकी गुप्ता, दिवाकर साह, बादल दे, विजय चौधरी, देवराज सोनकर, लालू निषाद, मो. नजीर हुसैन, नागेंद्र साह समेत संघ के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित थे.
ठेकेदार ने कहा
ठेकेदार गंगा प्रसाद गुप्ता ने कहा कि मंगलाहाट की बंदोबस्ती 29 जनवरी 2025 से 29 जनवरी 2028 तक के लिए की गयी है. आलू-प्याज तथा मांस-मछली दुकानदारों से प्रतिदिन 50 रुपये महसूल लिया जाता है. सब्जी विक्रेताओं से 5 से 20 रुपये तथा 8/10 साइज की दुकानों पर 30 रुपये प्रति दुकान भूमिकर वसूला जाता है, जो बंदोबस्ती के एकरारनामा में अंकित है. उन्होंने यह भी कहा कि बंदोबस्ती के बाद सभी दुकानदारों को अपनी दुकानों के पास डस्टबिन रखने का निर्देश दिया गया है, लेकिन अधिकतर दुकानदार इसका पालन नहीं कर रहे हैं और कचरा इधर-उधर फेंक देते हैं, जिससे गंदगी की समस्या उत्पन्न हो रही है.
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