कभी गुलजार रहने वाली सीसीएल तारमी कोलियरी की कॉलोनी अब वीरान हो चुकी है. मजदूरों और अधिकारियों के लिए बनाये गये 72 क्वार्टर खंडहर हो चुके हैं. चोर क्वार्टरों में लगे सामान को तोड़ कर बेच चुके हैं. काॅलोनी में माइनस टाइप के 32, बी टाइप के 24 और ए व सी टाइप के 16 क्वार्टर के अलावे पीओ बंगला था, जो रखरखाव के अभाव में जर्जर हो गये. यहां का मनोरंजन केंद्र भी झाड़ियों से ढंक गया है. डिस्पेंसरी भी बंद हो गयी. सुविधाओं की कमी व कॉलोनी की खस्ता हालत के कारण मजदूर दूसरी जगहों में शिफ्ट कर गये. अधिकारी मकोली में सीसीएल के आवासों में शिफ्ट कर गये. .
वर्ष 2016 से शुरू हुआ बदहाली का दौर
वर्ष 1967-68 में प्राइवेट खान मालिक मदनलाल बसमतिया ने तारमी कोलियरी में कार्यालय भवन बनाया व कोयला खनन की शुरुआत की थी. 17 अक्टूबर 1971 को राष्ट्रीयकरण के बाद इस कोलियरी की पहचान सीसीएल ढोरी एरिया के अधीन संचालित होने वाली एसडीक्यू थ्री तारमी कोलियरी के रूप में रही. वर्ष 2016 में सीसीएल उच्च प्रबंधन एसडीक्यू थ्री तारमी व इससे सटे एसडीक्यूवन परियोजना को मिलाकर एक नया प्रोजेक्ट एसडीओसीएम बनाया. इसका कार्यालय पूर्व से संचालित एसडीक्यू वन कल्याणी के परियोजना कार्यालय में शिफ्ट कर दिया गया. बाद में यहां संचालित विभागों को स्थानांतरित कर एसडीओसीएम के कल्याणी स्थित कार्यालय में शिफ्ट किया जाने लगा.तारमी ओसीपी के विस्तार की आस
वर्ष 2012 में एक नयी प्रोजेक्ट तारमी आउटसोर्स परियोजना अस्तित्व में आयी. कुछ वर्षों के बाद यह बंद हो गयी. पुन: वर्ष 2018 में शुरू हुई. अब यह एसडीओसीएम का एक पार्ट बन कर रह गयी है. एसडीक्यू थ्री तारमी परियोजना कार्यालय भवन में ही एसडीओसीएम परियोजना के कुछ विभागों के कार्यालय संचालित है. तारमी ओसीपी का विस्तार भी नहीं हो सका. परियोजना का विस्तार होता है, तो आवासों को तोड़ा व ओसीपी कार्यालय को भी यहां से हटाया जा सकता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
