फुसरो नगर परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव पर पूरे झारखंड की नजर है. वर्ष 2018 की तरह यहां कांग्रेस का सिक्का कायम रहेगा या झामुमो या भाजपा कांग्रेस को शिकस्त देने में कामयाब होंगे. यह तो चुनाव के दिन जनता तय करेगी. तीन प्रमुख दलों भाजपा, कांग्रेस व झामुमो के वरीय नेताओं की डायरेक्ट इंट्री के कारण चुनावी गर्मी काफी बढ़ गयी है. इस चुनाव में कांग्रेस-झामुमो गठबंधन में जहां दरार है, वहीं भाजपा-आजसू गठबंधन एकजुट दिख रहा है.
कांग्रेस ने झाेंकी पूरी ताकत
कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष पद की प्रत्याशी निर्मला देवी के पक्ष में बेरमो विधायक कुमार जयमंगल सिंह ने मोर्चा संभाल रखा है. विधायक की पत्नी व धनबाद लोस क्षेत्र से कांग्रेस की प्रत्याशी रही अनुपमा सिंह के अलावा अनुज झारखंड युवा आयोग के अध्यक्ष कुमार गौरव के नेतृत्व में पूरा कांग्रेस महकमा लगा हुआ है. पिछले पांच साल तथा उसके बाद दो साल तक नगर परिषद के विकास कार्यों की निगरानी खुद विधायक ने संभाल रखी थी. इसलिए इस चुनाव में जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी है.
भाजपा के लिए बना प्रतिष्ठा का विषय
भाजपा समर्थित प्रत्याशी ममता देवी के पक्ष में भाजपा का पूरा कुनबा लगा हुआ है. बेरमो विस का चुनाव हार चुकी भाजपा के लिए अपनी राजनीतिक वापसी के लिए नप अध्यक्ष पद का चुनाव प्रतिष्ठा का विषय बना हुआ है. यही कारण है अभी तक कई भाजपा नेता यहां आकर कार्यकर्ताओं की हौसला आफजाई कर चुके हैं. इसमें प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, रवींद्र राय, पूर्व मंत्री अमर बाउरी, बिरंची नारायण, धनबाद के विधायक राज सिन्हा शामिल हैं. पूर्व सांसद रवींद्र कुमार पांडेय व बेरमो के पूर्व विधायक योगेश्वर महतो बाटुल क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं.
झामुमो के कई विधायक व पूर्व मंत्री उतरे
झामुमो समर्थित प्रत्याशी बीना कुमारी के पक्ष में भी पार्टी के कई विधायक व पूर्व मंत्री ने अपनी ताकत लगा रखी है. झामुमो बेरमो में एक नये राजनीतिक समीकरण का संदेश देने को आतुर दिख रहा है. यहीं वजह है कि झामुमो ने अपने समर्थित प्रत्याशी के पक्ष में कई विधायक व पूर्व मंत्री को उतार दिया है. विधायक मथुरा प्रसाद महतो, विधायक उमा कांत रजक, पूर्व मंत्री बेबी देवी के अलावा दिवंगत मंत्री जगरनाथ महतो के पुत्र झामुमो नेता अखिलेश महतो लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं.
