Bokaro News : गोमिया और ऊपरघाट क्षेत्र में थम नहीं रहा है हाथियों का उत्पात

Bokaro News : गोमिया और नावाडीह के ऊपरघाट क्षेत्र में वर्षों से हाथियों का उत्पात जारी है.

बेरमो अनुमंडल के गोमिया और नावाडीह के ऊपरघाट क्षेत्र में वर्षों से हाथियों का उत्पात जारी है. बीते वर्ष आधार दर्जन से अधिक लोगों की मौत हाथी के कुचलने से हुई थी और दर्जनों लोग घायल हुए थे. 24 जनवरी 2025 को ऊपरघाट के बरई, पलामू, दरजी मुहल्ला व छोटकी कुड़ी में हाथियों ने उत्पात मचाया था. कमरजहां खातून, मंझलू मांझी व उनकी पत्नू सूरजी देवी को कुचल दिया था. इसमें से सूरजी देवी की मौत हो गयी थी. हाथियों ने कई किसानों की चहारदीवारी व घर का दरवाजा भी तोड़ दिया था. खेत में लगी फसलें भी बर्बाद कर दी थी. लगभग पांच घंटे के बाद वनकर्मी पहुंचे थे. छह फरवरी 2025 को कंडेर पंचायत के सिमराबेड़ा गिधिनिया में हाथियों ने 24 वर्षीय रंजू देवी को कुचल कर मार डाला था. 25 जून को प बंगाल निवासी कलाम आजाद, पचमो के बघरिया निवासी गुड़िया कुमारी, तुलबुल निवासी लालजी महतो, कोयो के चेगना मांझी को हाथियों ने कुचल कर मार डाला. 30 जनवरी 2025 को हाथियों ने रजरप्पा व घघरी के बीच जंगल में एक अधेड़ को पटक कर घायल कर दिया. एक जनवरी की रात को गोपो में खूब उत्पात मचाया. दो जनवरी की रात हरिदगढ़ा में तीन-चार घरों और दुकानों को क्षतिग्रस्त कर सैकड़ों मन धान और चावल बर्बाद कर दिया था. सब्जियों की फसलों को रौंद दिया था. गत वर्ष महुआटांड़ क्षेत्र के गोपो (धवैया) में रात के अंधेरे में एक कुएं में गिरने से एक हाथी की मौत हो गयी थी. वर्तमान में 15 दिनों में हाथियों ने गोमिया क्षेत्र में कई घरों को तोड़ दिया और फसलों को नुकसान पहुंचाया है.

घटते वन क्षेत्र ने बढ़ाया खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों का खतरा घटते वन क्षेत्र ने बढ़ा दिया है. क्षेत्र में हाथियों का विचरण पहले ऊपरघाट क्षेत्र में होता रहा है. ऊपरघाट क्षेत्र में घना जंगल होने के कारण हाथियों को आहार मिल जाता है. पहले हाथी आते थे तथा कुछ दिनों के बाद झुमरा पहाड़ के रास्ते पलामू बेतला के जंगलों में चले जाते थे. लेकिन सीसीएल के कमांड एरिया में कई नयी माइंस के खुलने तथा कई माइंस का विस्तार होने से घने जंगल उजड़ गये. सीसीएल अंतर्गत केदला, घाटो, बड़काकाना, रजरप्पा, कुजू, बेरमो के गोविंदपुर प्रोजेक्ट, एकेके व कारो परियोजना के अलावा ढोरी के अमलो, तारमी प्रोजेक्ट के खुलने व विस्तारीकरण के कारण जंगल उजाड़े गये. जंगल क्षेत्र में माइंस खुल जाने से अब हाथियों का झुंड क्षेत्र में आता है, तो उसे वापस जाने का रास्ता नहीं मिलता है. हाथी कई दिनों तक एक ही क्षेत्र में रह कर उत्पात मचाते हैं. जब उन्हें खदेड़ा जाता है तो शहरी क्षेत्र होते हुए किसी तरह अन्य क्षेत्र के जंगल में घुस जाते हैं.

वन विभाग के पास नहीं है कारगर उपाय

हाथियों के उत्पात को रोकने और उसे घनी आबादी वाले इलाके से खदेड़ने के लिए वन विभाग के पास कोई कारगर व्यवस्था नहीं है. क्षेत्र में हाथियों को आने से रोकने का भी कोई उपाय नहीं है. गांवों में भी ग्रामीणों को कोई ऐसी सुविधाएं मुहैया नहीं करायी जाती है, जिसकी मदद से वे तत्काल हाथियों को खदेड़ सके. ग्रामीणों के पास टार्च, केरोसिन व पटाखे तक मौजूद नहीं रहते हैं.

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Published by: Janak singh choudhary

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