बोकारो. ग्रामीण इलाकों में हर घर तक नल से साफ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू किये गये जल जीवन मिशन में बोकारो की रफ्तार लगातार धीमी होती गयी है. योजना शुरू होने के करीब सात साल बाद भी जिले के लक्ष्य का आधा ही हासिल हो सका है.
जिले में 3,16,589 ग्रामीण घरों को नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन अब तक 1,59,058 घरों में ही नल का कनेक्शन पहुंचा है. यानी कुल लक्ष्य का 50.24 प्रतिशत ही पूरा हो सका है.
खास बात यह है कि योजना शुरू होने के समय ही जिले के 21,148 घरों में नल से जल पहुंच रहा था. इसके बावजूद पिछले वर्षों में कनेक्शन देने की गति अपेक्षित नहीं रही. वर्ष 2022 में जल जीवन मिशन के तहत कार्य प्रगति और हर घर नल से जल पहुंचाने के मामले में बोकारो राज्य में तीसरे स्थान पर था. अब जिला खिसककर 16वें स्थान पर पहुंच गया है.
दूसरे जिलों ने बोकारो को पीछे छोड़ा
जल जीवन मिशन में बोकारो की स्थिति की तुलना दूसरे जिलों से करें तो तस्वीर और स्पष्ट होती है. कभी राज्य में बेहतर प्रदर्शन करने वाला बोकारो अब कई ऐसे जिलों से भी पीछे है, जो पहले उससे पिछड़े माने जाते थे. पलामू और गिरिडीह जैसे जिले भी हर घर नल से जल पहुंचाने के मामले में बोकारो से आगे निकल गये हैं.
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75 गांवों के पूर्ण आच्छादन का दावा, 68 प्रमाणित
जिले में 75 गांवों ने जल जीवन मिशन के तहत पूरी तरह आच्छादित होने का दावा किया है. इनमें 68 गांवों को सर्टिफाइड किया जा चुका है. इसी तरह 29 पंचायतों ने भी पूर्ण आच्छादन का दावा किया था, जिनमें 28 पंचायतों को सर्टिफाइड किया गया है. हालांकि, जिले का एक भी प्रखंड अभी तक पूरी तरह आच्छादित नहीं हुआ है.
बेरमो सबसे आगे, चंदनकियारी सबसे पीछे
हर घर नल कनेक्शन देने के मामले में बेरमो प्रखंड जिले में सबसे आगे है. यहां 20,814 घरों को कनेक्शन देने का लक्ष्य है, जिसके मुकाबले 17,411 घरों में कनेक्शन दिया जा चुका है. यह 83.65 प्रतिशत है.
गोमिया में 52,689 घरों के लक्ष्य के मुकाबले 35,191 घरों यानी 66.79 प्रतिशत को कनेक्शन मिला है. पेटरवार में 31,687 में से 21,813 घरों यानी 68.84 प्रतिशत, नावाडीह में 26,625 में से 14,437 यानी 54.22 प्रतिशत और चंद्रपुरा में 24,099 में से 12,988 यानी 53.89 प्रतिशत घरों तक नल पहुंचा है.
वहीं कसमार में 18,574 में से 7,499 घरों यानी 40.37 प्रतिशत, चास में 71,090 में से 24,192 यानी 34.03 प्रतिशत और चंदनकियारी में 50,108 में से 16,804 घरों यानी 33.54 प्रतिशत घरों में ही नल कनेक्शन पहुंच सका है.
इस तरह चंदनकियारी प्रखंड जिले में सबसे पीछे है.
साल दर साल घटती गयी काम की रफ्तार
आंकड़ों पर नजर डालें तो शुरुआती वर्षों के बाद योजना के तहत काम की गति लगातार कम हुई है. वित्तीय वर्ष 2019-20 में 2,862 घरों को जोड़ा गया था. 2020-21 में यह संख्या बढ़कर 44,495 हुई. 2021-22 में 39,980 और 2022-23 में 26,736 घरों को कनेक्शन मिला.
इसके बाद रफ्तार और कम होती गयी. 2023-24 में 20,345 घर, 2024-25 में सिर्फ 2,338 घर और 2025-26 में 950 घरों को कनेक्शन दिया गया. चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक महज 204 घरों को योजना से जोड़ा जा सका है.
बोकारो के 19 गांव योजना से बाहर
जल जीवन मिशन को लेकर बोकारो में एक अलग चुनौती भी है. जिले के 19 विस्थापित और अप्रुनर्वासित गांव योजना में शामिल नहीं हैं. इन गांवों में त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू होने के कारण इन्हें राजस्व गांव का दर्जा प्राप्त नहीं है.
हालांकि, इन गांवों में लोग पीढ़ियों से रहते आ रहे हैं और यहां 50 हजार से अधिक आबादी निवास करती है. ऐसे में इन गांवों को योजना के दायरे में शामिल नहीं किये जाने से बड़ी आबादी तक पाइपलाइन से पेयजल पहुंचाने की चुनौती बनी हुई है.
2028 तक बढ़ाया गया योजना का लक्ष्य
जल जीवन मिशन की शुरुआत 15 अगस्त 2019 को ग्रामीण परिवारों तक नल के जरिये सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से की गयी थी. शुरुआती लक्ष्य वर्ष 2024 तक पूरा करने का था, लेकिन निर्धारित समय में लक्ष्य हासिल नहीं होने के बाद इसे दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया गया है.
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योजना का उद्देश्य सिर्फ घरों तक पाइपलाइन पहुंचाना ही नहीं, बल्कि जल स्रोतों की स्थिरता, भूजल प्रबंधन, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और ग्रे वाटर प्रबंधन को भी मजबूत करना है.
सही तरीके से लागू होने पर कई समस्याओं का समाधान
जल जीवन मिशन के तहत घर-घर पाइपलाइन से पेयजल पहुंचने के साथ जल प्रबंधन को भी बढ़ावा दिया जाना है. इससे चापाकल और बोरिंग पर निर्भरता कम करने और भूजल के संरक्षण में मदद मिल सकती है.
योजना के तहत ग्राम पंचायत या ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति को स्थानीय जलापूर्ति व्यवस्था की योजना, संचालन और रखरखाव में भूमिका दी गयी है. समिति में महिलाओं और कमजोर वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का प्रावधान भी है.
बोकारो में अब चुनौती सिर्फ बचे हुए घरों तक कनेक्शन पहुंचाने की नहीं है, बल्कि काम की रफ्तार बढ़ाकर दिसंबर 2028 तक निर्धारित लक्ष्य हासिल करने की भी है.
