Bokaro News : एक साल के दरम्यान दूसरी देशव्यापी हड़ताल की तैयारी

Bokaro News : 12 फरवरी की प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा ने ताकत झोंक दी है.

केंद्र सरकार द्वारा लागू किये गये चार लेबर कोड के विरोध समेत अन्य मुद्दों को लेकर 12 फरवरी की प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा ने पूरी ताकत झोंक दी है. कोल इंडिया की हर कंपनी में मजदूर कन्वेंशन किया गया. फिलहाल सभी माइंसों में पिट मीटिंग की जा रही है. इस हड़ताल में कोयला, लोहा, बिजली, रेल, सेल, भेल, एलआइसी, जीआइसी, बैंक, डिफेंस, ट्रांसपोर्ट, आंगनबाड़ी, स्कील्ड वर्कर के अलावा राज्य व केंद्र सरकार के कर्मचारी शामिल रहेंगे. मालूम हो कि इसके पूर्व नौ जुलाई 2025 को भी चार लेबर कोड के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल हुई थी और इसमें लगभग 36 करोड़ संगठित व असंगठित क्षेत्र के मजदूर व कर्मचारी शामिल हुए थे. 12 फरवरी की प्रस्तावित हड़ताल में देश की 11 रजिस्टर्ड ट्रेड यूनियनें शामिल हैं. इसमें इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एक्टू, यूटीयूसी, यूटीयूसी लेनिन सरनी, एआइयूटीयूसी, सेवा, एलपीएफ, स्वतंत्र फेडरेशन के अलावा कई रिजनल यूनियनें शामिल हैं. एकमात्र भारतीय भारतीय मजदूर संघ इस हड़ताल में शामिल नहीं है.

क्या हैं कोयला उद्योग से जुड़ी मांगें

12 फरवरी की प्रस्तावित देशव्यापी हडताल में कोयला उद्योग से जुड़ी सात मांगें

मुख्य रूप से शामिल हैं. इसमें कोड ऑन वेजेजे-2019, इंडस्ट्रीयल रिलेशन कोड-2020, कोड ऑन सोशल सिक्यूरिटी-2020, ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वेलफेयर कंडिशनस-2020 को निरस्त करने, जेबीसीसीआइ-12 का गठन, ग्रेच्युटी सिलिंग में वृद्धि, कोल इंडिया व इसकी अनुषांगिक कंपनियों में विनिवेश पर रोक, आउटसोर्स से कोयला उत्पादन पर रोक, कॉमर्शियल माइनिंग पर रोक, एक्सप्लोरेशन, ड्रिलिंग व प्लानिंग के लिए 44 कंपनियों को दिये गये लाइसेंस को रद्द करने की बात शामिल है. केंद्रीय मांगों में चार लेबर कोड को निरस्त करने, मनरेगा का नाम नहीं बदलने, इंश्योरेंस कंपनी में सौ फीसदी विदेशी पूंजी पर रोक, बिजली बिल-2025 संशोधन बिल वापस लेने, शीड बिल-2025 ससधन वापस लेने की बातें शामिल हैं.

कोल इंडिया का उत्पादन होगा प्रभावित

हड़ताल से हर बार की तरह कोयला उत्पादन प्रभावित होगा. एक दिन की हड़ताल से कोल इंडिया में करीब 30 लाख टन तथा सीसीएल में तीन-चार लाख टन कोयला उत्पादन प्रभावित होगा. मालूम हो कि कोल इंडिया की हर कंपनी फिलहाल तेज गति से अपने उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जोरशोर से लगी हुई है.

क्या कहते हैं यूनियनों के पदाधिकारी

एटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेंद्र कुमार ने कहा कि चार लेबर कोड दरअसल पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने व मजदूर वर्ग को कमजोर करने के लिए लागू किया गया है. सरकार मजदूरों की वर्षों की मेहनत से अर्जित अधिकारों को खत्म करना चाहती है. सीटू के राष्ट्रीय सचिव डीडी रामानंदन ने कहा कि चार लेबर कोड मजदूरों के नहीं, बल्कि प्राइवेट मालिकों को लाभ पहुंचाने के लिए लागू किया गया है. मजदूरों के समक्ष करो या मरो की स्थिति है. केंद्र सरकार कोल इंडिया को तोड़ने का प्रयास कर रही है.

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By JANAK SINGH CHOUDHARY

JANAK SINGH CHOUDHARY is a contributor at Prabhat Khabar.

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