फुसरो. करगली गेट स्थित दुर्गा मंडप परिसर में आयोजित 68वें नौ दिवसीय रामचरित मानस यज्ञ के दूसरे दिन रविवार को मंडप की परिक्रमा के लिए श्रद्धालु उमड़े. सामूहिक रामायण पाठ में भी भाग लिया. शनिवार की शाम को प्रवचन में उज्जैन से आये आनंद स्वरूप बालकृष्ण गणेशदत्त जी शास्त्री ने कहा कि रामायण को वाल्मीकि जी तथा राम चरित मानस को तुलसीदास जी ने लिखा है. लोगों को ग्रंथों और कथाओं से प्रेम करना चाहिए. कथा भाग्यशाली लोगों को सुनने को मिलती है. कथा शब्द में क का अर्थ है ब्रह्म तथा था का अर्थ स्थापित करना होता है. यानि जो भगवान को स्थापित करे, उसे कथा कहते हैं. कथा मानो मंथन के लिए होता है. कहा कि रामायण में युद्ध के बाद जब राम जी ने हनुमान जी से कहा कि तुम भी बैकुंठ धाम, गोलोक और साकेत मेरे साथ चलो. हनुमान जी ने मना कर दिया कि वहां आपकी कथा सुनने को नहीं मिलेगी. इधर, यज्ञ के आयोजन को लेकर मनोज सिंह, सुशील सिंह, नितेश सिंह, अर्चना सिंह, निरंजन सिंह, नितेश सिंह, जयप्रकाश सिंह, शशिकांत सिंह, जितेंद्र सिंह, मिट्ठू, रवि राम, अमरेंद्र दुबे, गौरी शंकर सिंह, वीरेंद्र सिंह, योगेंद्र सिंह, राजू सिंह आदि लगे हुए हैं.
Bokaro News : ग्रंथों से प्रेम करना चाहिए : आनंद स्वरूप
Bokaro News : करगली गेट में आयोजित यज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धालु उमड़े.
