चास-बोकारो की लाइफ लाइन गरगा नदी को जल्द ही सॉलिड कचरा से मुक्ति मिलने वाली है. नदी में अब नालियों के जरिये कचरा नहीं जायेगा. चास नगर निगम ने इसके लिए तैयारी की है. चास में चिह्नित 18 नालियों में जाली लगायी जायेगी. यानी स्क्रीन सी चैंबर बनाया जायेगा. जाली इस तरीका से लगायी जायेगी कि नालियों के जाम होने की समस्या भी नहीं रहेगी. इस काम का शिलान्यास अगले कुछ दिनों में हो सकती है. गरगा नदी के प्रदूषण में सॉलिड कचरा बड़ा जिम्मेदार है. दैनिक इस्तेमाल में उपयोग आने वाला तमाम पदार्थ नाली के जरिये गरगा में जाता है. हर रोज गरगा में सैकड़ों किलो सॉलिड कचरा मिलता है. चास के मेयर भोलू पासवान ने कहा कि गरगा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए योजना बनी है. गुरुवार को संभवत: योजना का शिलान्यास हो जायेगा. गरगा नदी की सफाई बहुत जरूरी है. स्क्रीन सी चैंबर बन जाने से नाली से प्लास्टिक समेत अन्य सॉलिड कचरा नदी में नहीं जायेगा. लोगों को भी नदी की सफाई को लेकर जागरूक किया जायेगा. नगर निगम के अपर नगर आयुक्त संजीव कुमार ने कहा कि गरगा नदी की सफाई व आसपास के क्षेत्र के सौंदर्यीकरण के लिए दिल्ली बेस्ड एक कंपनी को हायर किया गया है. इस संबंध में उच्च स्तर पर बैठक भी हुई है. योजना के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनेगा. नमामि गंगे योजना के तहत गरगा को भी साफ किया जायेगा.
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट व नदी तट के सौंदर्यीकरण पर 40 करोड़ रुपये होंगे खर्च
गरगा नदी की स्वच्छता को लेकर बड़े पैमाने पर काम भी होने वाला है. पिछले दिनों डीसी ऑफिस में दिल्ली की एक एजेंसी ने इस संबंध में प्रजेंटेशन दिया था. जानकारों की माने तो नदी के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण होना है. गरगा नदी को ना सिर्फ प्रदूषण मुक्त किया जायेगा, बल्कि सौंदर्यीकरण की दिशा में भी पहल होगी. बोकारो को गरगा नदी के रूप में अपना मैरिन ड्राइव मिलेगा. जानकारी के मुताबिक गरगा नदी तट का बड़े पैमाने पर सौंदर्यीकरण होगा. विशेष तरह की लाइट लगायी जायेगी. वॉकिंग ट्रेक बनेगा. बोकारो समेत झारखंड की विशेषता की झलक दिखाने के लिए चित्रकारी होगी. सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट व नदी तट के सौंदर्यीकरण को लेकर 40 करोड़ रुपया खर्च किया जायेगा.35 किलोमीटर है नदी की लंबाई
गरगा नदी कसमार प्रखंड के कलौदी बांध तालाब से निकलती है और दामोदर नदी में मिलती है. गरगा नदी की लंबाई लगभग 35 किमी है. कसमार के गरी व तेलमुंगा गांव होते हुए नदी जरीडीह के वन चास होते हुए बाराडीह पहुंचती है. इस दौरान नदी में कई छोटी-छोटी जोरिया मिलते हैं. बाराडीह के बाद गरगाबाद गांगजोरी से चिलगड्डा होते हुए चास प्रखंड के राधागांव में नदी प्रवेश करती है. इसके बाद श्यामपुर के पास नदी पर डैम बनाया गया है. इसके बाद नदी बारी को-ऑपरेटिव, चास शहर, भर्रा होते हुए पुपुनकी के पास दामोदर नदी में मिल जाती है.
पहले भी बनती रही है योजना
गरगा नदी की सफाई की योजना दशकों से बन रही है. 2018 में नदी की सफाई को लेकर तत्कालीन बोकारो विधायक बिरंची नारायण ने विधानसभा में आवाज उठायी थी. चास में नगर निगम की ओर से 2017-18 में 40 करोड़ रुपये की लागत से सेप्टेज प्रबंध प्लांट लगाने की योजना बनी. दो एकड जमीन चिह्नित करने की बात भी कही गयी. बकायदे झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (जुडको) की ओर से सर्वे का काम हुआ. लेकिन, धरातल पर कुछ नहीं उतरा. इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से वर्ष 2020 में तत्कालीन डीसी राजेश कुमार के इनिसिएटिव पर लगभग 16 करोड़ का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की योजना तैयार की गयी. बकायदे प्रोजेक्ट बना कर रांची मुख्यालय भेजी गयी. लेकिन, 15 दिन पहले प्रोजेक्ट में तकनीकी खामी बता कर मुख्यालय से वापस कर दी गयी. प्रोजेक्ट दुबारा भेजने की बात कही गयी.
