परीक्षा कैंसल होने से घबड़ाहट थी, री-नीट के लिए मात्र एक माह का समय था...जो बहुत कम लग रहा था

री-नीट 2026 में बोकारो के इशान गोप ने ऑल इंडिया रैंक 517 हासिल कर जिला टॉप किया है। जानें उनकी प्रेरणादायक सफलता की कहानी और तैयारी के खास टिप्स।

बोकारो. सफलता यूं ही नहीं मिल जाती है, बल्कि इसके लिए मेहनत व परिश्रम जरूरी है. चिन्मय विद्यालय बोकारो के इशान गोप की सफलता की कहानी भी कुछ ऐसी ही हैं. इशान गोप री-नीट 2026 परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 517 रैंक हासिल कर बोकारो जिला टॉपर बना है. इशान ने 720 में से कुल 670 अंक प्राप्त कर 99.972 परसेंटाइल हासिल किया. सोमवार को इशान माता-पिता के साथ चिन्मय विद्यालय बोकारो पहुंचे. स्कूल प्रबंधन की ओर से इशान को सम्मानित किया गया. सचिव महेश त्रिपाठी, प्राचार्य सूरज शर्मा, वरीय उप प्राचार्य नरमेंद्र कुमार व उप प्राचार्य डॉ. रोशन शर्मा उपस्थित रहे. सभी ने इशान का मुंह मीठा कराया. पिता भागीरथ गोप केंद्रीय सरकार के कर्मचारी हैं तो माता श्वेता कुमारी गृहिणी हैं इशान गोप अपने परिवार में इकलौते हैं. उनके पिता भागीरथ गोप केंद्रीय सरकार के कर्मचारी हैं. माता श्वेता कुमारी गृहिणी हैं. इशान मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं. इशान ने बताया : चिकित्सा में अपना भविष्य कम उम्र से ही चुन लिया था.

इशान ने कहा कि घर में हमेशा से माहौल ऐसा ही मिला कि खुद ही चिकित्सा की ओर रुचि बन गई. बचपन में चाचा ह्यूमन बॉडी पार्ट का चार्ट लाते थे, जिसे देखना व समझना अच्छा लगता था. इशान के पिता भी अपने प्रारंभिक दिनों में जूलौजी के शिक्षक थे, जिसका इशान को अपनी नीट की तैयारी में फायदा भी मिला. इशान ने कहा : सफलता का मूल मंत्र केवल अभ्यास रहा है.

किसी भी विद्यार्थी को उसकी रुचि वाले विषय में निरंतर अभ्यास करते रहना चाहिए इशान ने कहा कि किसी भी विद्यार्थी को उसकी रुचि वाले विषय में निरंतर अभ्यास करते रहना चाहिए. दो महीने से अधिक समय तक सैंपल टेस्ट व मॉक टेस्ट का अभ्यास किया. इसका फायदा परीक्षा में मिला.

उन्होंने कहा कि विषय के प्रति रुचि बनी रहेगी, तो कॉन्सेप्ट समझना सरल होगा. नीट पेपर के कैंसिल होने के बाद थोड़ी घबड़ाहट थी. री-नीट की तैयारी के लिए मात्र एक महीने का समय था, जो बहुत कम लग रहा था. लेकिन, हतोत्साहित कभी नहीं हुआ और अभ्यास जारी रखा. संयोग ऐसा भी था कि नीट व री-नीट दोनों परीक्षा के दिन तबीयत ठीक नहीं थी, फिर भी पूरे लगन से परीक्षा दिया. आज परिणाम सामने हैं. खुद को न्यूरो सर्जन के रूप में देखना चाहते हैं इशान, रुचि न्यूरोलॉजी व दिमाग की चिकित्सा इशान ने नीट की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को सलाह देते हुए कहा : परिस्थिति चाहे कोई भी हो, हार नहीं मानना चाहिए. हर चुनौती को स्वीकार करते हुए अभ्यास जारी रखना चाहिए. इशान खुद को न्यूरो सर्जन के रूप में देखना चाहते हैं. उनकी रुचि न्यूरोलॉजी व दिमाग की चिकित्सा की ओर अधिक है. इशान ने कहा कि वे एक अच्छे और सफल डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना चाहते हैं. उनके चेहरे पर मुस्कान लाना चाहते हैं. इशान के माता-पिता अपने पुत्र की सफलता से बहुत खुश हैं और भावुक भी हैं. उधर, स्कूल चहुंचने पर इशान ने अपने गुरूजनों का आशीर्वाद लिया. सभी ने उसके उज्जवल भविष्य की कामना की.


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Author: Sunil kumar tiwari

Published by: Kumarvishwat Sen

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