कसमार. कसमार प्रखंड के हिसीम-केदला पहाड़ पर स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय, केदला में पढ़ने वाले 185 बच्चे हर दिन दोहरी परेशानी के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं. एक ओर जंगल से सटे खुले विद्यालय परिसर में जंगली जानवरों के पहुंचने का खतरा बना रहता है, वहीं दूसरी ओर कक्षा छह से आठ तक के 74 विद्यार्थियों के लिए एक भी शिक्षक पदस्थापित नहीं है. इससे विद्यालय की सुरक्षा और शैक्षणिक व्यवस्था दोनों पर सवाल उठ रहे हैं.
जंगल के बीच खुला है स्कूल परिसर
विद्यालय की चहारदीवारी अब तक नहीं बन पायी है. जंगल और पहाड़ी क्षेत्र के बीच स्थित स्कूल परिसर खुला रहने के कारण हाथी, भालू, बंदर समेत अन्य जंगली जानवरों के पहुंचने का खतरा बना रहता है. क्षेत्र में हाल के दिनों में खूंखार लोमड़ी के हमले की घटनाएं भी सामने आयी हैं. एक महिला की मौत की घटना के बाद अभिभावकों की चिंता और बढ़ गयी है.
ऐसे में स्कूल परिसर की सुरक्षा को लेकर अभिभावक और ग्रामीण चहारदीवारी निर्माण की मांग कर रहे हैं.
मापी के बाद भी शुरू नहीं हुआ चहारदीवारी का काम
विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष सह केदला निवासी झामुमो नेता दिलीप कुमार हेंब्रम ने बताया कि चहारदीवारी निर्माण को लेकर विभागीय अधिकारियों को कई बार जानकारी दी गयी है. विद्यालय परिसर की मापी भी हो चुकी है, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है.
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उन्होंने कहा कि पहाड़ और जंगल के बीच संचालित इस विद्यालय में चहारदीवारी कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी व्यवस्था है.
74 बच्चों के लिए एक भी शिक्षक नहीं
विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था भी चिंता का विषय बनी हुई है. स्कूल में कुल 185 विद्यार्थी नामांकित हैं. इनमें कक्षा छह में 25, कक्षा सात में 22 और कक्षा आठ में 27 विद्यार्थी हैं. यानी कक्षा छह से आठ तक कुल 74 बच्चों के लिए एक भी शिक्षक पदस्थापित नहीं है.
विद्यालय के प्राचार्य सुभय चक्रवर्ती ने बताया कि कक्षा छह से आठ तक शिक्षक नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. उपलब्ध शिक्षकों के सहारे सभी कक्षाओं का संचालन करना मुश्किल हो रहा है. वहीं, कक्षा नौवीं और दसवीं के लिए भी महज दो शिक्षक पदस्थापित हैं.
ग्रामीणों ने की चहारदीवारी और शिक्षकों की मांग
ग्रामीण ब्रजेश कुमार मुर्मू, अखिलेश्वर हेंब्रम, रामदास टुडू और मनोज कुमार हेंब्रम ने कहा कि वन क्षेत्र में स्थित विद्यालय के मामले में विभाग को विशेष ध्यान देने की जरूरत है. ग्रामीणों ने अविलंब विद्यालय की चहारदीवारी का निर्माण कराने और कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए शिक्षकों की पदस्थापना करने की मांग की है.
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ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में बच्चों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की व्यवस्था और सुरक्षित परिसर उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए.
