लगातार दो बार विधायक रहे झारखंड BJP के नेता का निधन, शोक की लहर, अपनी सादगी के लिए थे मशहूर
Jharkhand Political News: बोकारो जिले के चंदनकियारी विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहे गौर हरिजन का शुक्रवार सुबह निधन हो गया. उनके निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है. विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.
Jharkhand Political News: बोकारो जिले के चंदनकियारी विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके गौर हरिजन (71) का शुक्रवार सुबह करीब छह बजे निधन हो गया. उन्होंने चंदनकियारी प्रखंड अंतर्गत कौड़ियां गांव स्थित अपने आवास में अंतिम सांस ली. वे पिछले कुछ समय से लगातार अस्वस्थ चल रहे थे. उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गयी.
विभिन्न राजनीतिक दलों ने की श्रद्धांजलि अर्पित
पूर्व विधायक के निधन की सूचना मिलते ही विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और आम लोग बड़ी संख्या में उनके आवास पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. लोग उन्हें एक सादगीपूर्ण, ईमानदार और जनसेवा को समर्पित नेता के रूप में याद कर रहे हैं.
पहली बार 1990 में विधायक निर्वाचित हुए
गौर हरिजन वर्ष 1990 और 1995 में चंदनकियारी विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए थे. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भाजपा के टिकट पर की थी और पहली बार विधायक बने थे. इसके बाद 1995 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर क्षेत्र में अपनी मजबूत जनस्वीकृति का परिचय दिया था. वे हमेशा सरल जीवन, सहज व्यवहार और स्पष्ट विचारों के लिए जाने जाते थे.
अपने पत्नी और 3 पुत्र को छोड़ गये पूर्व विधायक
पूर्व विधायक गौर हरिजन अपने पीछे पत्नी अल्पना देवी और तीन पुत्र छोड़ गए हैं. उनके बड़े पुत्र नवीन कुमार दिल्ली में एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं, जबकि विकास कुमार झारखंड सरकार में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं. अन्य पुत्र तरुण कुमार और राकेश कुमार वर्तमान में बेरोजगार हैं. उनके निधन से क्षेत्र ने एक सिद्धांतनिष्ठ, सरल और जनसेवा के प्रति समर्पित जननेता को खो दिया है.
विधायक उमाकांत रजक ने जताया शोक
चंदनकियारी के वर्तमान विधायक उमाकांत रजक ने पूर्व विधायक गौर हरिजन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि गौर हरिजन जनसेवा को समर्पित, सरल और कर्मठ व्यक्तित्व के धनी थे. उनका पूरा जीवन समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों के अधिकार, सम्मान और उत्थान के लिए समर्पित रहा. विधायक उमाकांत रजक ने आगे कहा कि उनके जैसे नेता आज के दौर में दुर्लभ हैं. उन्होंने राजनीति को हमेशा सेवा का माध्यम माना और सादगी व ईमानदारी को अपना मूल मंत्र बनाया. उनका निधन न केवल चंदनकियारी ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है.
