Bokaro News : भाव अच्छा होने से मिलते हैं ईश्वर

Bokaro News : आनंद मार्ग धर्म महासम्मेलन के दूसरे दिन कई कार्यक्रम हुए.

आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से आनंद नगर में आयोजित आनंद मार्ग धर्म महासम्मेलन के दूसरे दिन शनिवार को कार्यक्रम की शुरुआत प्रभात संगीत, कीर्तन और सामूहिक ध्यान के साथ हुई. आचार्य विकाशानंद अवधूत ने श्री श्री आनंदमूर्ति जी के योगदान पर व्याख्यान दिया. कहा कि गहन साधना से नहीं, भाव अच्छा होने से ईश्वर मिलते हैं. ईश्वर और मनुष्य का संबंध किसी दूरस्थ, औपचारिक या दार्शनिक अवधारणा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अत्यंत निकट, आत्मीय और पारिवारिक है. जैसे एक माता-पिता अपने सभी बच्चों को समान प्रेम से देखते हैं, वैसे ही ईश्वर भी प्रत्येक जीव को समान दृष्टि से देखते हैं. माता-पिता यह नहीं देखते कि कौन अधिक पढ़ा-लिखा है या कौन कम योग्य है. उनके लिए सभी संतानें समान होती हैं. उसी प्रकार ईश्वर के लिए भी सभी मनुष्य एक समान हैं. वह किसी के ज्ञान, पद या स्थिति के आधार पर भेद नहीं करते, बल्कि सबको समान रूप से आध्यात्मिक पोषण प्रदान करते हैं. प्रेम का आधार बाहरी उपलब्धियां नहीं, बल्कि आंतरिक जुड़ाव होता है. माता-पिता का स्नेह बच्चों की शिक्षा या उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उनके अपनत्व और प्रेम से गहराता है. इसी तरह, ईश्वर के साथ भी संबंध ज्ञान या कर्मकांड से अधिक हृदय की सच्चाई और भावनात्मक निकटता पर आधारित होता है. अक्सर देखा जाता है कि विद्वान और पंडित अनेक शास्त्रों, सिद्धांतों और दर्शनों का अध्ययन करते हैं. यह अध्ययन उन्हें ज्ञान तो देता है, लेकिन कई बार उनके भीतर द्वंद्व भी उत्पन्न कर देता है. अलग-अलग विचारधाराओं के बीच उलझ कर वे यह तय नहीं कर पाते कि सत्य क्या है.

मनुष्य का मन जिस दिशा में जाता है, वह उसी ओर खिंचा चला जाता है

कहा कि मनुष्य का मन जिस दिशा में बार-बार जाता है, वह उसी ओर खिंचा चला जाता है. जब हम किसी से विवाद करते हैं, तो बार-बार उसी के बारे में सोचते रहते हैं. यही नियम ईश्वर के संदर्भ में भी लागू होता है. चाहे कोई व्यक्ति प्रेम से ईश्वर को याद करे या विरोध की भावना से, यदि उसका मन निरंतर उसी में लगा है, तो अंततः वह उसी तक पहुंचता है. इतिहास और कथाओं में ऐसे उदाहरण मिलते हैं, जहां विरोध के माध्यम से भी व्यक्ति ईश्वर के समीप पहुंच गया.

ईश्वर और मनुष्य के बीच का संबंध बाहरी नहीं, बल्कि आत्मिक है

कहा कि जिस परम सत्य या परम पुरुष को हम बाहर खोजते हैं, वह हमारे भीतर ही विद्यमान हैं. ईश्वर और मनुष्य के बीच का संबंध बाहरी नहीं, बल्कि आत्मिक है. इसे कोई तोड़ नहीं सकता, क्योंकि यह हमारे अस्तित्व का मूल है. आनंद मार्ग प्रचारक संघ की सांस्कृतिक शाखा ””””रेनेसां आर्टिस्ट्स एंड राइटर्स एसोसिएशन”””” ने भी प्रभात संगीत पर आधारित सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया. यह जानकारी केंद्रीय जनसंपर्क सचिव आचार्य दिव्यचेतनानंद अवधूत ने दी.

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