Bokaro News : दीपक सवाल, कसमार. बोकारो जिले में इस वर्ष तेंदू फल(केंद) का मौसम ग्रामीणों के लिए निराशा लेकर आया. कसमार और सीमावर्ती जरीडीह प्रखंड समेत जिले के कई इलाकों में तेंदू फल का उत्पादन लगभग शून्य रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि उनकी स्मृति में यह पहली बार हुआ है, जब तेंदू के पेड़ों पर फल नहीं के बराबर लगे हों. इसका सीधा असर हजारों ग्रामीण परिवारों की आय पर पड़ा है, क्योंकि तेंदू फल यहां की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार माना जाता है.
हर वर्ष तेंदू फल के मौसम में गांवों की तस्वीर बदल जाती थी. जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों से ग्रामीण तेंदू फल चुनकर स्थानीय हाट-बाजारों और शहरों तक पहुंचाते थे. इससे हजारों परिवारों को मौसमी आमदनी होती थी. पिछले वर्ष तेंदू फल 40 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिके थे. ऐसे में इस वर्ष उत्पादन नहीं होने से जिले भर में करोड़ों रुपये की संभावित आय प्रभावित होने का अनुमान लगाया जा रहा है.खराब मौसम के कारण अधिकतर फूल झड़ गये और जो बचे, वे भी बाद के प्रतिकूल मौसम में टिक नहीं सके. यही वजह है कि इस वर्ष तेंदू फल का उत्पादन नहीं के बराबर हुआ. तेंदू फल की अनुपस्थिति ने केवल जंगलों की हरियाली ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों की आर्थिक उम्मीदों को भी प्रभावित किया है. अब ग्रामीणों की नजर अगले मौसम पर टिक गयी है, इस उम्मीद के साथ कि आने वाला साल फिर से जंगलों और गांवों में तेंदू की बहार लौटाएगा.
ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी
उनके गांव में हर वर्ष करीब एक सौ क्विंटल तेंदू फल की उपज होती रही है, लेकिन इस बार उत्पादन नहीं के बराबर हुआ. उनके अनुसार इससे गांव की लाखों रुपये की आमदनी प्रभावित हुई है और ग्रामीणों में मायूसी है.
लक्ष्मण कुमार महतो, कुकुरतोपा, जरीडीहतेंदू फल का मौसम गांव वालों के लिए अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण समय होता है. लोग पूरे साल इसकी प्रतीक्षा करते हैं, लेकिन इस बार पेड़ों पर फल नहीं आने से कई परिवारों को आर्थिक झटका लगा है.
सुरेंद्र महतो, लिपूभस्की गांव में तेंदू के असंख्य पेड़ हैं और हर साल अच्छा उत्पादन होता था, लेकिन इस बार पेड़ों पर फल दिखाई ही नहीं दिये. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी गयी और ग्रामीण इसकी वजह को लेकर चिंतित हैं.
लालधन टुडू, पूर्व मुखिया, भस्की पंचायतगुमनजारा सहित पहाड़ पर बसे अन्य राजस्व गांवों में तेंदू के हजारों पेड़ हैं, जहां हर साल सैकड़ों क्विंटल उत्पादन होता था. गांव की अर्थव्यवस्था में इसकी अहम भूमिका है, लेकिन इस बार उत्पादन ठप रहने से ग्रामीणों में निराशा व्याप्त है.नरेश सोरेन, गुमनजारा, कसमारउनके क्षेत्र में तेंदू फल ग्रामीणों की आमदनी का बड़ा साधन रहा है. सैकड़ों पेड़ों से हर साल लोग अच्छी कमाई कर लेते थे, लेकिन इस वर्ष पेड़ों में फल नहीं लगना गंभीर चिंता का विषय है.
लालकिशोर महतो, गोपालपुरगांव में तेंदू के केवल मेरे अपने दस पेड़ हैं. हर वर्ष कम से कम 30 क्विंटल का उत्पादन होता है और अच्छी खासी आमदनी होती है. लेकिन इस वर्ष उत्पादन बिल्कुल नहीं हुआ. इससे आर्थिक क्षति हुई है.-सुखदेव महतो
मौसम की मार रही वजह
इस असामान्य स्थिति के पीछे मौसम की मार को बड़ी वजह रही है. मार्च महीने में हुई बेमौसम बारिश, कई दौर के ओलावृष्टि और तेज आंधी-तूफान ने तेंदू के फूलों को भारी नुकसान पहुंचाया. इसी समय तेंदू के पेड़ों में फूल आने लगते हैं.प्रसेनजीत कुमार, कृषि विशेषज्ञ
