Bokaro News : तेनुघाट के कस्तूरबा स्कूल परिसर में लगी आग

Bokaro News : तेनुघाट स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय उच्च विद्यालय के परिसर में आग लग गयी.

तेनुघाट स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय उच्च विद्यालय के परिसर में शुक्रवार को दिन लगभग साढ़े दस बजे आग लग गयी. चारों सूखी घांस और झाड़ियों के कारण आग की लपटें ऊंची उठने लगी. इसके कारण हड़कंप मच गया. प्रभारी वार्डन विनिता कुमारी ने ओपी प्रभारी भजन लाल महतो और स्थानीय मुखिया नीलम श्रीवास्तव को फोन कर सूचना दी. मुखिया की सूचना पर अग्नि शामक वाहन पहुंचा और आग बुझायी गयी. समय रहते आग बुझा दिये जाने से लाखों की क्षति होने से विद्यालय बच गया. प्रभारी वार्डन ने बताया कि विद्यालय परिसर में आये दिन गरमी के दिनों में आग लग जाती है या किसी के द्वारा लगा दी जाती है. घटना के समय स्कूल में छात्राएं नहीं थीं, परीक्षा देने गयी थीं. मौके पर शिक्षिका कलावती कुमारी, रेखा कुमारी, खुशबू कुमारी, सुनीता कुमारी, किरण कुमारी महादेव मिश्रा, वीरेंद्र मिश्रा सहित कई लोग मौजूद थे.

चंद्रपुरा के जंगलों में अगलगी की घटनाओं से पर्यावरण को हो रहा नुकसान

चंद्रपुरा क्षेत्र के जंगलों में पिछले सप्ताह भर में आग लगने की कई घटनाएं हुई हैं. शुक्रवार को खानूडीह गांव के पास जंगल में भयंकर आग लग गयी और इसने दो किमी वन क्षेत्र को अपने आगोश में ले लिया था. यह आग चंद्रपुरा भंडारीदह सड़क मार्ग से सटे जंगल में लगी. इसके कारण इस सड़क से गुजर रहे लोगों को परेशानी हुई. चार दिन पूर्व भंडारीदह के सोनाडाली व राजाबेड़ा रेलवे ट्रैक एरिया के जंगल में भयंकर आग लगी थी. नावाडीह से आयी वन विभाग की टीम देर रात को आग बुझाने में सफल हुई. दो दिन पूर्व चंद्रपुरा आवासीय कॉलोनी एरिया में भी इसी जंगल में आग लगी थी और कई क्वार्टरों तक पहुंच गयी. चंद्रपुरा की आवासीय कॉलोनी से शुरू होकर यह जंगल सात किमी दूर भंडारीदह के सोनाडाली में समाप्त होता है. जंगल के बगल से ही चंद्रपुरा–भंडारीदह सड़क है. जंगल में काफी पेड़-पौधे तो हैं ही, विविध प्रकार के जीव-जंतु व पक्षी भी काफी संख्या में हैं. इस जंगल की सुंदरता सागवान, शीशम, आकाशी सखुआ, नीम, महुआ और बांस के पेड़ बढ़ाते हैं. जंगलों में आग लगने से ना सिर्फ पेड़-पौधे जल कर नष्ट हो रहे हैं, बल्कि वन संपदा को काफी नुकसान हो रहा है. वन्य जीवों को भी नुकसान पहुंचाया है. आग कैसे लग रही है, इसका स्पष्ट कारण तो पता नहीं चल रहा है. मगर हर वर्ष महुआ पेड़ों के नीचे सुखी पत्तियों व झाड़ियों की सफाई के लिए आग लगा दिये जाने की बात कही जा रही है. बता दें कि चंद्रपुरा के जंगलों में मोर, खरगोश, सियार, सांप, नेवला सहित अन्य वन्य जीव बहुत संख्या में हैं.

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Published by: Janak singh choudhary

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