बोकारो: गुणात्मक शिक्षा के साथ बच्चों की कलात्मक व सांस्कृतिक प्रतिभा निखारने के उद्देश्य से दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो में एक बार फिर रंगारंग प्रस्तुतियों का अनुपम उत्सव शुरू हुआ. विद्यालय की सीनियर इकाई में सोमवार को चारदिवसीय सांस्कृतिक सप्ताह (कल्चरल वीक)-धरोहर का आगाज़ अंतर-सदन समूह तबलावादन व एकल गान प्रतियोगिताओं से हुआ.
तबले पर जहां 10 मात्रा के झपताल की लयकारी गूंजी, वहीं एकल-गायन में बाल कलाकारों ने गज़लों की ऐसी मौसिकी छेड़ी कि पूरा माहौल एक सुरीली महफ़िल में तब्दील हो गया. उनकी प्रस्तुतियां साधना और प्रतिभा का संगम रहीं.
बच्चाें ने कायदा, टुकड़ा, परन, पेशकार आदि बखूबी पेश किया
मनोरम मंच साज-सज्जा के बीच कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य डॉ. एएस गंगवार ने वरीय उपप्राचार्य अंजनी भूषण व उपप्राचार्या शालिनी शर्मा व विभिन्न हाउस वार्डन के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. समूह तबलावादन में आकर्षक व रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे-धजे छोटे उस्तादों की तबले पर फिरकियों की तरह नाचतीं उंगलियां, उनकी थाप और लयकारी का आपसी सामंजस्य अपने-आप में अनूठा रहा. झपताल के विभिन्न प्रकारों को बच्चों ने आकर्षक तरीके से पूरी ऊर्जा के साथ प्रस्तुत किया. कायदा, टुकड़ा, परन, पेशकार आदि को उन्होंने बखूबी पेश किया.
वक्त का ये परिंदा...दयार-ए-दिल की रात...आज जाने की ज़िद न करो...
बेहतर प्रदर्शन के आधार इस स्पर्धा में जमुना हाउस की टीम पहले स्थान पर रही, तो झेलम ने दूसरा तथा चेनाब सदन की टोली ने तीसरा स्थान प्राप्त किया. वहीं, गजल थीम पर आधारित एकल-गायन की शुरुआत चेनाब सदन से अर्थित सिंह ने मिलकर जुदा हुए... से की. इसके बाद क्रमशः गंगा सदन की मैत्रेयी सिन्हा ने वक्त का ये परिंदा..., जमुना की शांभवी झा ने नीयत-ए-शौक भर न जाए..., सतलज हाउस की आंचल पाठक ने दयार-ए-दिल की रात..., रावी सदन की छात्रा अद्रिका कुमार ने आज जाने की ज़िद न करो... और झेलम हाउस के पीयूष मल्लिक ने रिश्तों के सारे मंज़र... पेश कर सबकी भरपूर तालियां बटोरीं.
