संविधान सभा के सदस्य व झारखंड पार्टी के संस्थापक मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा और देश की पहली शिक्षिका सावित्री बाई फुले की जयंती पर शनिवार को झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया. चलकरी दक्षिणी पंचायत के बाघा टोंगरी स्थित झारखंड आंदोलनकारी स्मारक स्थल में आयोजित हुए कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने दोनों के चित्रों पर माल्यार्पण किया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में झारखंड आंदोलनकारी शामिल हुए और जयपाल सिंह मुंडा की जयंती को झारखंड आंदोलनकारी दिवस घोषित करने की मांग की.
भाकपा माले नेता भुवनेश्वर केवट ने कहा कि 80 वर्षों के लंबे आंदोलन के बाद झारखंड अलग राज्य हासिल हुआ है. झारखंड उपहार में नहीं मिला, बल्कि संघर्षों और शहादत की देन है. झारखंड अलग राज्य आंदोलन में जेल नहीं जाने वाले आंदोलनकारियों को सम्मान पेंशन दी जाये. आंदोलनकारियों और शहीदों के आश्रितों को को क्षैतिज आरक्षण के बजाय सीधी नियुक्ति की गारंटी दी जाये. कहा कि राज्य और केंद्र सरकार झारखंड आंदोलनकारियों के भावना का ख्याल रखें, वरना यहां के जंगल, जमीन और खनिजों की अंधाधुंध लूट के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत होगी.झारखंड को बचाने के लिए आंदोलन की जरूरत
अशोक मंडल ने कहा कि शहीद झारखंड आंदोलनकारियों को आज भी उचित सम्मान नहीं दिया जा रहा है. मारंग गोमके और सावित्री बाई फुले की जीवनी और संघर्ष को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए. झारखंड आंदोलनकारी नेता पंचानन मंडल ने कहा कि झारखंड आंदोलन की तरह ही झारखंड को बचाने के लिए आंदोलन तेज करना होगा. कार्यक्रम की अध्यक्षता इंद्रदेव सिंह ने की. मौके पर पदुम महतो, बैजनाथ गोराई, राज केवट, ज्ञान सिंह, दुर्गा सिंह, रामदास हांसदा, चुन्नीलाल केवट, ठाकुर लाल मांझी, मकसूद आलम, कामेश्वर गिरि, चुनीलाल रजवार, भूषण केवट, लखन लाल नायक, गणपत सिंह, खूबलाल नायक, नरेश गिरि, कामेश्वर नायक, रूपलाल केवट, कमल मांझी आदि उपस्थित थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
