बोकारो, फाल्गुन की खुमार चढ़ गयी है. चार मार्च को रंगों का त्योहार मनाया जायेगा. लेकिन, प्राकृतिक में रंग घुलने का इंतजार अभी भी करना पड़ रहा है. जिस फूल से प्राकृतिक का शृंगार होता है या कहें, तो जिस फूल से रंग बनाया जाता रहा है, वह फूल अभी तक खिला नहीं है. बात हो रही है पलाश की. झारखंड का राजकीय फूल पलाश अबतक नहीं खिला है. बोकारो के जंगलों में खिला पलाश यहां की फाल्गुनी खूबसूरती को बढ़ाता था, लेकिन अभी तक यह खूबसूरती देखने को नहीं मिली है. लोगों में पलाश फूल के अबतक नहीं खिलने का अलग-अलग तर्क दिये जा रहे हैं. कुछ लोगों की माने, तो इस साल होली का त्योहार अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से कुछ पहले आया है. इस कारण फूलों की कमी देखी जा रही है. जबकि कुछ लोगों का मानना है कि जलवायु में आ रहे परिवर्तन का असर दिख रहा है. भारतीय पर्व सूर्य व चांद की चाल से तय होते हैं, मौसम भी सूर्य व चांद की चाल के अनुसार ही बदलता है. इस कारण होली के पहले आने का सवाल ही नहीं उठता है. पर्यावरणविद नीतीश प्रियदर्शी की माने तो सिर्फ पलाश के फूल की ही बात नहीं है, बहुत फूलों के खिलने के समय में परिवर्तन देखा जा रहा है. कुश का फूल भी समय से पहले खिल रहा है. इसी साल आम में मंजर अभी ही भरपूर मात्रा में आ गया है. यह अवधि से पहले की गति है. श्री प्रियदर्शी ने अमेरिकी विश्वविद्यालय के उस रिसर्च का हवाला भी दिया, जिसमें गर्मी के कारण फूलों के खिलने का समय बिगड़ा है. अमेरिकी विश्वविद्यालय की रिपोर्ट की माने तो धरती के गर्म होने के कारण फूलों के खिलने का समय बदल रहा है. कुछ फूल समय से पहले खिल रहे हैं, तो कुछ फूल देर से खिल रहे हैं. बोकारो के परिवेश में देखे, तो यहां पलाश का फूल अबतक नहीं आया, जबकि आम का मंजर समय से भरपूर मात्रा में आया है. अमेरिकी विश्वविद्यालय की रिपोर्ट में भारत का भी जिक्र किया गया है.
Bokaro News : फाल्गुन का खुमार, फीकी पड़ी पलाश की बयार
Bokaro News : पलाश फूल के अबतक नहीं खिलने का दिये जा रहें हैं अलग-अलग तर्क, जलवायु परिवर्तन का मिलने लगा संकेत, समय से पहले आ गये हैं आम के मंजर.
