सीपी सिंह, बोकारो, बोकारो के यातायात लाइफ लाइन का महत्वपूर्ण अंग माने जाने वाला हिंदुस्तान पुल कभी भी धाराशायी हो सकता है. दामोदर नद पर फुसरो-पिछरी क्षेत्र में कोयलांचल को स्टील नगरी से जोड़ने वाले इस पुल के कई बेयरिंग टूट चुके हैं. कई स्थानों पर बड़ा दरार आ चुका है. फुसरो की ओर से पिछरी जाने के क्रम में दूसरे व तीसरे खंभे के बेयरिंग में बड़ी दरार व टूट स्पष्ट तौर पर नजर आ रही है. जबकि, कई अन्य खंभे के बेयरिंग में दरार का चिन्ह दिख रहे है.
अति के कारण टूट रहा है पुल
हिंदुस्तान पुल का निर्माण 1957 में शुरू हुआ. 1961 में आवागमन शुरू हो गया. पुल का निर्माण पांच दशक की कार्ययोजना को देखते हुए कराया गया था. वर्तमान समय में वाहनों की वजन क्षमता अधिक हो गयी है. कई वाहन 55 से 70 टन माल के साथ भी गंतव्य तक पहुंचती है. क्षमता से अधिक वजन वाली वाहनों के आवागमन का भार पुल पर पड़ता है. खंभे व डेक के बीच स्थापित बेयरिंग, जो तापमान बदलाव या कंपन के कारण होने वाले मूवमेंट को समायोजित करता है, उसपर इस वजन का असर हो रहा है.अभी तक सिर्फ ऊपर से ही मरम्मत
एक कहावत है बाहरी रूप से आंतरिक सच्चाई का पता नहीं चलता. हिंदुस्तान पुल को लेकर यह कहावत सटीक बैठती है. ऐसा इसलिए क्योंकि जब भी पुल मरम्मत की बात हुई है सिर्फ ऊपरी सड़क की मरम्मत करा दी जाती है. वर्तमान में भी ऊपरी स्तर का मरम्मत कराया गया है. कभी भी पुल के आंतरिक स्थिति पर सर्वे तक नहीं हुआ है. बावजूद इसके कि पुल बने 60 साल से अधिक का समय हो चुका है. पुल पर ऊपरी मरम्मत के कारण कंपन डिस्ट्रीब्यूशन पर भी असर हो रहा है.लाखों की आबादी व करोड़ों का कारोबार का जरिया है पुल
हिंदुस्तान पुल की महत्ता इससे समझी जा सकती है कि इससे लाखों लोग सीधे तौर पर जुड़े हैं. बोकारो इस्पात संयंत्र, ओएनजीसी, इंडियन ऑयल, एचपीसीएल जैसे पीएसयू व इलेक्ट्रोस्टील-वेदांता कंपनी का उत्पाद को बाजार का रास्ता इसी पुल से गुजरता है. सीसीएल से बोकारो रेलवे यार्ड तक कोयला इसी पुल से होकर पहुंचती है. वहीं राजधानी रांची को उपराजधानी दुमका से जोड़ने वाली रास्ता भी इसी पुल से होकर जाती है. यानी लाखों की आबादी इस पुल का इस्तेमाल हर दिन करता है.1957 में शुरू हुआ था निर्माण, इस कारण नाम पड़ा
पुल का निर्माण वर्ष 1957 में शुरू हुआ था. उस समय यह क्षेत्र तत्कालीन हजारीबाग जिले का हिस्सा हुआ करता था. पुल के 11 खंभों पर आधारित इस संरचना का निर्माण कार्य तीन वर्षों तक चला. 1960 में यह पुल बनकर तैयार हुआ. पुल का निर्माण देश की प्रतिष्ठित संस्था हिन्दुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी ने किया. इसी कारण यह ‘हिन्दुस्तान पुल’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ.
बोले बरेमो विधायक
बेरमो विधायक कुमार जयमंगल ने कहा कि पुल की महत्ता बेरमो समेत बोकारो जिला के लिए है. क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई है. टीम के जरिये सर्वे कराया जायेगा. जल्द ही मरम्मत को लेकर कार्रवाई होगी. पुल बहुत पुराना भी हो चुका है, अगर जरूरत हुई तो समानांतर में नया पुल खड़ा किया जायेगा.
बोले उपायुक्त
उपायुक्त अजयनाथ झा ने कहा कि हिंदुस्तान पुल जिला का मेजर पुल है. इससे जिला सीधे तौर पर जुड़ा है. यातायात के लिहाज से यह जरूरत है. पुल में किसी प्रकार की दरार या टूट दुर्घटना का कारण बन सकती है. पुल निरीक्षण को लेकर टीम गठित होगी, मंगलवार को टीम जायेगी. पुल की स्थिति का आकलन होगा. आकलन के बाद पुल मरम्मत या अन्य कार्रवाई की जायेगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
