बोकारो, शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थी को जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करने का माध्यम है. इसी उद्देश्य के साथ सीबीएसइ के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, पटना की ओर से डीपीएस बोकारो में सोमवार को जीवन-कौशल (लाइफ स्किल्स) विषय पर एकदिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया.
संसाधन सेवी (रिसोर्स पर्सन) एमजीएम हायर सेकेंडरी स्कूल की उपप्राचार्या राखी बनर्जी व वरीय शिक्षिका कंचन सिंह ने इस बात पर विशेष बल दिया कि जीवन कौशल कार्यक्रम शिक्षा के लक्ष्यों को प्राप्त करने का एक मार्ग है, जो साक्षरता को वास्तविक शिक्षा से जोड़ता है. कहा कि शैक्षणिक उपलब्धि और जीवन-कौशल एक-दूसरे के पूरक हैं. शिक्षण और अध्यापन में जीवन-कौशल एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं, जो केवल किताबी ज्ञान को व्यवहार में बदलने का काम करते हैं.जीवन-कौशल साक्षरता व वास्तविक ज्ञान के बीच का सेतु : प्राचार्य
प्राचार्य डॉ एएस गंगवार ने कार्यशाला को नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप महत्वपूर्ण बताया. कहा कि जीवन-कौशल साक्षरता व वास्तविक ज्ञान के बीच का सेतु हैं, जो छात्रों को ना केवल परीक्षाओं के लिए, बल्कि जीवन की हर चुनौती के लिए तैयार करते हैं. इन कौशलों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि ये शिक्षा को बोझिल होने से बचाते हैं. सीखने की प्रक्रिया को आनंदमय बनाते हैं. जब शिक्षक स्वयं इन कौशल से लैस होंगे, तभी वे कक्षा में उत्साहजनक व सहायक शिक्षण वातावरण तैयार कर सकेंगे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
