– जमकडीह और तुलबुल के 100 महली परिवारों का जीवन आधार है ‘बांस’

– जमकडीह और तुलबुल के 100 महली परिवारों का जीवन आधार है ‘बांस’

नागेश्वर,ललपनिया : बोकारो जिला के गोमिया प्रखंड अंतर्गत होसिर पश्चिमी व तुलबुल पंचायत के जमकडीह और तुलबुल ग्राम में लगभग एक सौ महली परिवार बांस के बनी सामाग्री बनाकर गुजर बसर कर रहे हैं. इन सभी परिवार से जुडे लोगों का कहना है कि इस धंधे में जुडे लोगो को कोई सरकारी सुविधा नहीं मिली है. सुविधा मिले तो अपने इस धंधे को और विकसित कर सकते हैं. जमकडीह गांव के वयोवृद्ध तालो महली (82 वर्ष) व उनकी पत्नी शकुंतला देवी (70 वर्ष) के अलावा पुत्रवधू भी इस धंधे में जुड़े हैं. दोनों दंपती में तालो महली का कहना है कि यह कार्य अपने दस वर्षों की उम्र से जुडे हैं. मैंने सातवीं तक पढ़ाई की. पैसे के अभाव में पढाई नहीं कर पायी और विगत 70 वर्षों से बांस की बने सामग्री बनाकर कर बाजार हाट के अलावा पर्व त्योहारों में बेच कर जीवन-यापन कर रहे हैं. कहा आजकल के युवक इस धंधा को पसंद नहीं करते, पुराने लोगों ने ही इसे जीवंत रखा है. आनेवाले 10-20 वर्षों में ह पूरी तरह से लुप्त हो जायेगी. मालूम हो कि बांस की बनी सामाग्रियां बंगाल तक लोग ले जाते हैं. वहीं स्थानीय बाजारों में साडम, स्वांग, तुलबुल के अलावा कथारा, बेरमो, जरीडीह, बोकारो तक बेचने के लिए ले जाते हैं. इस धंधे में जुड़े लोगों का कहना है कि जब जंगल में बांस हुआ करता था तो दो रुपये का परमिट कटाकर जंगल से बांस लाते थे. अब वह सिस्टम बंद हो गया. अब ग्रामीण क्षेत्रों में जिनके पास रोपा बांस है. वहीं से खरीददारी करते हैं, जो काफी महंगा हो गया है. महंगा बांस मिलने पर धंधा पर प्रतिकूल असर पड़ा है. पहले किसान धान रखने के लिए डेमनी बनाते थे तथा धान कटाई के बाद धान पेराई के लिए सूप की जरूरत पड़ती थी, पर धान की पैदावार कम होने से डेमनी, सूप, धान मापी के लिए दउरे की मांग कम होने लगी है. अब सिर्फ शादी ब्याह, पर्व त्योहारों में लगने वाली सामाग्री ही बनाते हैं. कहा कि सरकारी सुविधा मिले, तो हम सभी अपने धंधे को और विकसित करते, सहायता नहीं मिलने से कमोबेश सामग्रियां बनाकर धंधा से जुड़े हैं.

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