सूखे और बेजान पेड़ों को रंग-कूची व छेनी की मदद से कलाकृति का रूप देने की कला दुनिया भर में बेहद लोकप्रिय है. इसमें मृत तनों को तराश कर या पेंट कर जीव-जंतुओं, चेहरों और काल्पनिक आकृतियों में बदल दिया जाता है. इसकी झलक स्टील सिटी बोकारो में भी दिख रही है. बीएसएल टाउनशिप की सड़कों के डिवाइडर, सेक्टर चार थाना के निकट बने पार्क, ””””सुरभि केंद्र”””” के सेक्टर-04 (आंबेडकर चौक निकट) के निकट, प्लांट के अंदर विभिन्न पार्कों, सिटी पार्क, जैविक उद्यान सहित दर्जनों स्थानों पर बीएसएल की पहल से सूखे-बेजान पेड़ों को कला के जरिये रौनक दी जा रही है. उक्त स्थानों में हिरण, नंदी, भगवान श्रीगणेश, कंगारू, मशरूम, बारहसिंगा सहित कई तरह की कलाकृतियां सूखे-बेजान पेड़ों को तराश कर बनायी गयी हैं, जाे लोगों के बीच चर्चा का विषय है.
दुखद नजारे को सुखद अनुभूति में बदलने का प्रयास
अधकटे सूखे पेड़ों को देखना दुखद लगता है, लेकिन, इस दुखद नजारे को सुखद अनुभूति में बदलने के प्रयास में महिला समिति बोकारो एंड टीम जुटी हुई है. यह बदलाव कला के माध्यम से आ रहा है. समिति का मुख्य काम जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है. सुरभि केंद्र में बेजान पेड़ों को सुंदर कलाकृति बनाने के काम में महिला समिति की पदाधिकारी व समिति की ओर से संचालित केंद्रों में कार्यरत महिलाएं जुटी हैं. सूखे पेड़ों के निचले तने को छोड़ बाकी हिस्सा काट दिया जाता है. इसके बाद इस पर कलाकृति बनायी जाती है.
