Bokaro News : वर्ष 2013 के चुनाव में 884 मतों के अंतर से जीती थीं अर्चना सिंह

Bokaro News : फुसरो नगर परिषद के दूसरा चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए 19 प्रत्याशी मैदान में थे.

फुसरो नगर परिषद का दूसरा चुनाव वर्ष 2013 में हुआ था. इस चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए 19 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे. नीलकंठ रविदास ने 3764 मत प्राप्त कर 577 वोट के अंतर से जीत हासिल की थी. दूसरे स्थान पर निर्दलीय जितेंद्र तांती तथा तीसरे स्थान पर शिवलाल रविदास रहे थे. सबसे बड़ी जीत वार्ड नंबर 17 की पार्षद प्रत्याशी अर्चना सिंह ने हासिल की थी. उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी माधुरी सिंह को 884 मतों के अंतर से पराजित किया था. अर्चना सिंह को 1072 तथा माधुरी सिंह को 188 मत मिले थे. सबसे कम अंतर से जीत वार्ड नंबर 14 के आनंद राम ने हासिल की थी. उन्होंने भोला रविदास को मात्र चार मतों के अंतर से हराया था. आनंद राम को 314 तथा भोला रविदास को 310 मत प्राप्त हुए थे. इस चुनाव में 14 महिलाएं पार्षद बनी थीं. 13 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित थे. बिना महिला आरक्षण वाले तत्कालीन वार्ड पांच से नीरु देवी ने जीत हासिल की थी. वार्ड नंबर दो से सुनीता निर्विरोध रही थीं. उनके विरोध में कोई अन्य प्रत्याशी नहीं खड़ी हुई थी.

काम के नाम पर सिर्फ योजनाएं ही बनी थीं

वर्ष 2008 में बनी 45 करोड़ रुपये की प्रस्तावित जलापूर्ति योजना को लेकर तीन बार टेंडर हुआ. लेकिन तीनों बार सिंगल टेंडर हो गया. तीसरा टेंडर होने के साथ ही नगर परिषद के तीसरे टर्म के चुनाव की घोषणा हो गयी थी. इस तरह इस योजना का टेंडर फाइनल होने से पहले अटक गया. तत्कालीन अध्यक्ष नीलकंठ रविदास के अनुसार ठेकेदार ने योजना के लिए गलत ढंग से बगैर स्थल निरीक्षण किये ही छह स्थानों पर पानी टंकी निर्माण का नक्शा नगर विभाग में जमा कर दिया था. स्थल निरीक्षण में नक्शा फर्जी पाया गया. काफी प्रयास के बाद सीसीएल से एनओसी लेकर डीपीआर बनाने की बात तय हुई. इसके लिए फंड भी मुहैया हो गया. लेकिन चुनाव आ जाने के कारण दूसरे कार्यकाल में डीपीआर तक नहीं बन सकी. इसी तरह पहले कार्यकाल की योजना सिवरेज ड्रेनेज तथा नयी योजना के तहत पार्क के लिए तत्कालीन नगर विकास विभाग के सचिव अरुण कुमार द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया, लेकिन इससे आगे बात नहीं बढ़ी. इस कार्यकाल में रहीमगंज, रानीबाग, पटेलनगर, ढोरी बस्ती के बड़ा नाली की योजना बनी. लेकिन डीपीआर इसका भी नहीं बन सका. इस तरह उपलब्धि के नाम पर होल्डिंग टैक्स चालू होना रहा. इससे फंड आने पर छोटी-छोटी नाली, सड़क आदि के कार्य हो सके.

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Published by: Janak singh choudhary

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