उरला थाने के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) रोहित मालेकर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें वह कथित तौर पर खमतराई थाने में ईसाई समुदाय के सदस्यों के प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति को उन्हें छूने से मना करते और चेतावनी देते नजर आ रहे हैं. पुलिस के अनुसार, यह कथित घटना 21 और 22 अगस्त की दरम्यानी रात की है. खमतराई थाना क्षेत्र के एक घर से पुलिस ने धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया था.
पुलिस ने दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं की शिकायत के बाद यह कार्रवाई की थी. कार्यकर्ताओं ने महिलाओं पर धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया था. गिरफ्तारी के बाद ईसाई समुदाय के सदस्य तीनों महिलाओं की रिहाई और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने के लिए खमतराई थाने पहुंचे थे. अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मालेकर को खमतराई थाने में तैनात किया गया था. सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) पूर्णिमा लामा भी वहां मौजूद थीं.
वायरल वीडियो में क्या आ रहा है नजर
वायरल वीडियो में एक व्यक्ति मालेकर की ओर बढ़ता दिखाई देता है. इसके बाद मालेकर उसे यह कहते हुए सुने जा सकते हैं कि उनके शरीर को नहीं छूना चाहिए. वह व्यक्ति को उन्हें छूने पर चेतावनी देते हुए भी सुनाई देते हैं. मालेकर के पीछे खड़ी एक महिला पुलिसकर्मी भी व्यक्ति से कहती सुनाई देती है कि वह अधिकारी को नहीं छू सकता. इस पर व्यक्ति कहता सुनाई देता है कि उसने अधिकारी को छुआ ही नहीं है.
अधिकारी पर ईसाई समुदाय के लोगों को डराने-धमकाने का आरोप
वीडियो सोशल मीडिया पर इस दावे के साथ साझा किया जा रहा है कि प्रदर्शन के दौरान अधिकारी ईसाई समुदाय के सदस्यों को डरा-धमका रहे थे. राज्य के संयुक्त मसीह समाज के अध्यक्ष प्रभाकर सोनी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान लामा, मालेकर और एक अन्य महिला पुलिसकर्मी ने समुदाय के सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार किया और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
सोनी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, ‘‘हमने रायपुर के उत्तर क्षेत्र के पुलिस उपायुक्त को शिकायत देकर एसीपी पूर्णिमा लामा, निरीक्षक रोहित मालेकर और एक महिला कांस्टेबल को निलंबित करने की मांग की है.’’
महिलाओं को ‘‘झूठे आरोपों’’ के आधार पर थाने लाया गया : सोनी
सोनी ने आरोप लगाया कि एक घर में प्रार्थना कर रहीं 26 महिलाओं को ‘‘झूठे आरोपों’’ के आधार पर थाने लाया गया और इनमें से तीन के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उचित सत्यापन के बिना उन्हें जेल भेज दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि जब समुदाय के सदस्य महिलाओं की गिरफ्तारी और हिरासत के बारे में पुलिस से सवाल करने थाने पहुंचे तो एसीपी, निरीक्षक और एक अन्य महिला पुलिसकर्मी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया.
सोनी ने आरोप लगाया, ‘‘मालेकर ने हमसे कहा कि मुझे मत छुओ, हमें धमकाया और हमारे साथ अहंकारपूर्ण व्यवहार किया.’’
