बाबा हरिहरनाथ मंदिर
बाबा हरिहरनाथ मंदिर, सोनपुर
छपरा के सोनपुर स्थित प्रसिद्ध हरिहरनाथ मंदिर में सावन मास में पूजा-अर्चना और जलाभिषेक के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. हरिहरनाथ मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित भगवान शिव और विष्णु की एकीकृत मूर्ति है. मान्यता है कि यह मूर्ति ब्रह्मा द्वारा स्थापित की गई थी और दुनिया में इस तरह की एकमात्र मूर्ति मानी जाती है. मंदिर की प्राचीनता और धार्मिक महत्व के कारण देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
बाबा गरीबनाथ मंदिर
बाबा गरीबनाथ मंदिर, मुजफ्फरपुर
मुजफ्फरपुर के बीचों-बीच स्थित गरीबस्थान मंदिर, बाबा गरीबनाथ धाम के नाम से प्रसिद्ध है. इसे श्रद्धालु बिहार का 'देवघर' भी कहते हैं. सावन के महीने में यहां आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. लाखों कांवरिया रेवा और पहलेजा घाट से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हुए बाबा का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. मान्यता है कि बाबा गरीबनाथ अपने भक्तों की हर सच्ची प्रार्थना सुनते हैं.
अजगवीनाथ मंदिर
अजगवीनाथ मंदिर, भागलपुर
सावन में अजगवीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. देवघर जाने से पहले शिवभक्त पहले अजगवीनाथ के दर्शन करने आते हैं. मंदिर के शिवलिंग पर जलाभिषेक का अलग ही महत्व है. देश-विदेश से श्रद्धालु सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेने पहुंचे हैं. वे पहले अजगवीनाथ के मनोकामना शिवलिंग का अभिषेक करते हैं. उसके बाद 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर देवघर पहुंचते हैं.
बाबा सिंहेश्वर नाथ मंदिर
बाबा सिंहेश्वर नाथ मंदिर, मधेपुरा
सिंहेश्वर नाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन धार्मिक स्थल है, जिसे श्रद्धालुओं की अपार आस्था प्राप्त है. यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. मान्यता है कि यह स्थान महर्षि श्रृंगी की तपोभूमि था, जहां मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जन्म के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ संपन्न हुआ था, जिससे यह क्षेत्र सिंहेश्वर स्थान के रूप में विख्यात हुआ. सावन में यहां भारी भीड़ लगती है.
बाबा कुशेश्वर स्थान
बाबा कुशेश्वर स्थान, दरभंगा
दरभंगा के पास शिव जी का बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है कुशेश्वरस्थान, जिसे मिथिलांचल का देवघर कहा जाता है. मान्यता है कि प्रभु श्रीराम के पुत्र कुश ने यहां शिवलिंग स्थापित किया था जो जंगलों के बीच में छिप गया था. फिर एक गाय के कारण इस शिवलिंग को ढूंढा जा सका. आज इस मंदिर के प्रति भक्तों की इतनी आस्था है कि बिहार के साथ-साथ नेपाल से भी श्रद्धालु यहां आते हैं.
बाबा दूधेश्वरनाथ
बाबा दूधेश्वरनाथ मंदिर, औरंगाबाद
हर वर्ष यहां महाशिवरात्रि, श्रावण मास में लगने वाला मेला पूरे राज्य में प्रसिद्ध है. दूर दूर से श्रद्धालु आते हैं और बाबा दूधेश्वरनाथ पर जलाभिषेक करते हैं. कहा जाता है कि बाबा दूधेश्वरनाथ की स्थापना भगवान राम ने की थी. महर्षि च्यवन ऋषि के आश्रम के कारण इसे च्यवनाश्रम के नाम से भी प्रसिद्व इस स्थान पर लगभग 600 वर्षों से निरंतर 24 घंटे तक निरंतर जलने वाली धुनी है. कई देवी-देवताओं की प्रतिमा है.
उगना महादेव मंदिर
गुप्ता धाम
गुप्ता धाम, रोहतास
जिस तरह लोग तमाम मुश्किलें पार करके लोग भोलेनाथ के दर्शन के लिए केदारनाथ और बद्रीनाथ जाते हैं, ठीक इसी तरह बिहार के रोहतास में एक और धाम है, जिसे गुप्ता धाम के नाम से जाना जाता है. यह मंदिर रोहतास जिले के चेनारी प्रखंड में है, जो गुप्ताधाम के नाम से भी मशहूर है. ऐसी मान्यता है कि भस्मासुर शिव को भस्म करने के लिए दौड़ा तो भगवान शिव भागकर इस गुफा के गुप्त स्थान पर छिप गए थे.
कोटेश्वर नाथ धाम मंदिर
कोटेश्वर नाथ धाम मंदिर, गया
गया-जहानाबाद जिला के सीमावर्ती क्षेत्र में बाबा कोटेश्वर नाथ धाम मंदिर अति प्राचीन होने के कारण काफी प्रसिद्ध है. इस धाम का गर्भ गृह लाल पत्थर के टुकड़े में बनी हुई है. यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रहती है. इस धाम पर दूर-दूर से लोग मंदिर की संरचना को देखने आते है. दन्त कथा के अनुसार वाणासुर की बेटी उषा श्री कृष्ण के पोते से प्रेम करती थी.
श्री गौरीशंकर बैकुण्ठधाम
श्री गौरीशंकर बैकुण्ठधाम, पटना
राजधानी पटना से सटे बैकटपुर गांव में स्थित है प्राचीन और एतिहासिक शिवमंदिर जिसे श्री गौरीशंकर बैकुण्ठधाम के नाम से भी जाना जाता है. इस प्राचीन मंदिर की महिमा अतीत के कई युगों से जुड़ी हुई है. इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां शिवलिंग रूप में भगवान शिव के साथ माता पार्वती भी विराजमान हैं, इतना ही नहीं पूरे शिवलिंग पर 108 छोटे-छोटे शिवलिंग भी बने हुए हैं.
