जांच व कार्रवाई में झूल रहीं जिप की योजनाएं

हाजीपुर : जिला पर्षद की राजनीति में एक बार फिर गरमाहट आ गयी है. विकास कार्यों में गबन-घोटाले का मामला फिर से तूल पकड़ता नजर आ रहा है. निवर्तमान उपविकास आयुक्त सह जिला पर्षद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी ओम प्रकाश यादव ने जाते-जाते इस मामले को तूल दे दिया है. स्थानांतरण के बाद जिले से […]

हाजीपुर : जिला पर्षद की राजनीति में एक बार फिर गरमाहट आ गयी है. विकास कार्यों में गबन-घोटाले का मामला फिर से तूल पकड़ता नजर आ रहा है. निवर्तमान उपविकास आयुक्त सह जिला पर्षद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी ओम प्रकाश यादव ने जाते-जाते इस मामले को तूल दे दिया है.
स्थानांतरण के बाद जिले से अपनी विदाई के ऐन पहले डीडीसी श्री यादव ने जिला पर्षद में हुए कथित घोटाले की जांच निगरानी विभाग से कराये जाने की जरूरत बतायी. जाने से पहले उन्होंने इस संबंध में निगरानी विभाग और पंचायती राज विभाग को पत्र भी भेजा. इधर, जिला पर्षद अध्यक्ष जय प्रकाश चौधरी एवं जिला पार्षदों का कहना है कि जिला पर्षद की जिन योजनाओं में श्री यादव द्वारा गबन की बात कही गयी है, उनमें किसी योजना का उन्होंने स्थल निरीक्षण भी नहीं किया.
अध्यक्ष का कहना है कि पूर्व जिलाधिकारी द्वारा जिले के वरीय पदाधिकारियों से योजनाओं का भौतिक निरीक्षण कराया गया था, जिसमें राशि के गबन का कोई साक्ष्य नहीं पाया गया. स्थानीय लेखा परीक्षा शाखा, महालेखाकार कार्यालय बिहार, पटना द्वारा किये गये जिला पर्षद के वित्तीय अंकेक्षण में भी गबन का कोई उल्लेख नहीं है. अध्यक्ष और जिला पार्षद कहते हैं कि अनियमितता के नाम पर जिला पर्षद के सारे विकास कार्यों को महीनों पहले से रोक दिया गया. यह जनता के साथ धोखा है.
डीडीसी ने उठाया था लगभग 20 करोड़ की अनियमितता का मुद्दा : निवर्तमान डीडीसी ओम प्रकाश यादव ने अनियमितता और हेराफेरी का आरोप लगाते हुए नवंबर ,2015 की 28 तारीख को जब जिला पर्षद के जिला अभियंता, सहायक अभियंता और कनीय अभियंता को बरखास्त करने का आदेश जारी किया, तो जिला पर्षद की राजनीति में उबाल आ गया.
इस मामले में डीडीसी के अपने तर्क थे. डीडीसी का कहना था कि जिला पर्षद में 13 वें वित्त आयोग एवं बीआरजीएफ की राशि से जो योजनाएं ली गयीं, उनके क्रियान्वयन में भारी अनियमितता बरती गयी. वर्ष 2013-14 एवं 2015-16 की विभिन्न योजनाओं में प्रारंभिक जांच के आधार पर पाया गया कि लगभग 15 करोड़ 18 लाख 84 हजार रुपये की योजनाओं के कोई अभिलेख संधारित नहीं किये गये. डीडीसी ने लगभग 400 योजनाओं में वित्तीय अनियमितता एवं गबन को अपनी कार्रवाई का आधार बनाया था. इसके अलावा पूर्व जिला अभियंता शिशिर कुमार द्वारा करोड़ों के गबन के मामले में भी कार्रवाई की बात कही थी.
इस मामले में पूर्व अभियंता शिशिर कुमार ने दो दिसंबर, 2015 डीडीसी को पत्र भेज कर उनके विरुद्ध मानहानि का मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी दी थी. पूर्व जिला अभियंता का कहना है कि मेरे ऊपर लगाये गये गबन के आरोप बेबुनियाद थे, यह से जांच से स्पष्ट हो चुका है. निगरानी विभाग एवं लोकायुक्त द्वारा की गयी जांच में मुझे बेदाग पाया गया.
बोर्ड की बैठक का इंतजार है जिला पर्षद को : जिला पर्षद में व्याप्त गतिरोध और आपसी टकराहट का प्रमुख कारण बैठक का नहीं होना है. जिला पर्षद अध्यक्ष के बार-बार कहने और लिखित आदेश के बाद भी मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी न सिर्फ बोर्ड की बैठक, बल्कि वित्त अंकेक्षण एवं योजना समिति, सामान्य स्थायी समिति आदि की बैठकों को भी लगातार टालते रहे. यदि ये बैठकें बुलायी जातीं, तो इन समस्याओं का समाधान भी निकल गया होता.
जिला पार्षदों और पर्षद के कर्मियों का कहना है कि निर्वतमान डीडीसी ने बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 के नियमों की अवहेलना करते हुए मनमाने तरीके से अभियंताओं के विरुद्ध कार्रवाई की. बिना किसी जांच रिपोर्ट के, बिना किसी सिफारिश के और बिना बैठक में प्रस्ताव पारित कराये डीडीसी द्वारा अभियंताओं को सीधे सेवामुक्त करना कहीं से उचित नहीं है. बहरहाल, पार्षदों को बोर्ड की बैठक बुलाये जाने का इंतजार है, ताकि बैठक में सभी पहलुओं पर चर्चा हो और उचित निर्णय लिये जा सकें.

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