Bihar News: वैशाली जिले की सूखी पड़ी बरैला झील अब एक नई पहचान की ओर बढ़ रही है. बिहार सरकार इसे सलीम अली जुब्बा सहनी पक्षी अभ्यारण्य के रूप में विकसित करने जा रही है. इस योजना पर काम शुरू हो चुका है. जल संसाधन विभाग ने इसके लिए 53 करोड़ 35 लाख 21 हजार रुपये की बड़ी राशि स्वीकृत की है.
यह फैसला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा के दौरान लिया गया था. उन्होंने बरैला झील को पक्षियों के सुरक्षित ठिकाने के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी. इसके बाद राज्य सरकार ने इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाया.
बरैला झील में पानी की रही है सबसे बड़ी समस्या
बरैला झील में सबसे बड़ी समस्या पानी की रही है. कई बार झील सूख जाती है. इससे प्रवासी और स्थानीय पक्षियों को नुकसान होता है. इसी को देखते हुए जल संसाधन विभाग को निर्देश दिया गया कि झील में नियमित पानी लाने और जल स्तर बढ़ने पर निकासी की व्यवस्था की जाए.
योजना के तहत झील को साल भर जलयुक्त रखने की व्यवस्था होगी. इससे पक्षियों को अनुकूल माहौल मिलेगा. प्रवासी पक्षी यहां रुक सकेंगे. स्थानीय जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलेगा. बरैला झील धीरे-धीरे पक्षियों के लिए सुरक्षित स्वर्ग बन सकेगी.
स्थानीय लोगों के लिए भी फायदेमंद होगी यह परियोजना
सरकार का मानना है कि यह परियोजना सिर्फ पर्यावरण के लिहाज से ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी फायदेमंद होगी. अभ्यारण्य बनने के बाद पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. गांव और आसपास के इलाकों की पहचान भी मजबूत होगी.
नालों और चैनलों को किया जाएगा दुरुस्त
जल संसाधन विभाग के अनुसार, स्वीकृत राशि से झील में पानी लाने के लिए संरचनात्मक कार्य होंगे. नालों और चैनलों को दुरुस्त किया जाएगा. जरूरत के अनुसार निकासी व्यवस्था भी बनाई जाएगी. ताकि बारिश या अधिक जल स्तर से किसी को परेशानी न हो.
बरैला झील को अभ्यारण्य के रूप में विकसित करने से वैशाली जिले को एक नई पर्यावरणीय धरोहर मिलेगी. यह योजना आने वाले वर्षों में जिले की तस्वीर बदल सकती है. सरकार को उम्मीद है कि बरैला झील एक बार फिर जीवन और चहचहाहट से भर उठेगी.
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