No Muslim Minister in Bengal Cabinet: पश्चिम बंगाल में नयी सरकार ने शपथ ले ली है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और 5 अन्य विधायकों ने शपथ ली. ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में जिन लोगों को शपथ दिलायी गयी, उनमें महिला, आदिवासी और मतुआ समुदाय के लोग हैं, लेकिन कोई मुस्लिम नहीं है. पश्चिम बंगाल के इतिहास में यह पहला मौका है, जब सरकार में कोई मुस्लिम मंत्री नहीं बना है.
ममता बनर्जी ने मुस्लिम समाज के 4 कैबिनेट और 4 राज्यमंत्री बनाये थे
वर्ष 2021 में जब ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आयी थी, तब मुस्लिम समाज से लोगों को 7 मंत्री बनाया गया था. इनमें से 4 को कैबिनेट मंत्री और 3 को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया था. ममता की सरकार में फिरहाद हकीम, मो गुलाम रब्बानी, जावेद अहमद खान, मौलाना सिद्दीकुल्ला चौधरी, अखरुज्जमान और सबीना यासमीन को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था.
बीजेपी ने नहीं दिया था किसी मुस्लिम को टिकट
अब सवाल उठता है कि जब शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पहली बार बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार ने शपथ ली, तो मंत्रिमंडल में कोई मुस्लिम क्यों नहीं है. इस सवाल का जवाब यह है कि भाजपा ने बंगाल विधानसभा चुनाव 2007 में किसी मुस्लिम को टिकट ही नहीं दिया था. इसलिए उसके 207 विधायकों में एक भी मुस्लिम एमएलए नहीं है.
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शुभेंदु के साथ इन 5 मंत्रियों ने ली शपथ
शुभेंदु अधिकारी के साथ खड़गपुर सदर विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए भाजपा के फायरब्रांड नेता दिलीप घोष, आसनसोल दक्षिण की एमएलए अग्निमित्रा पॉल, मतुआ समाज के अशोक किर्तनिया, आदिवासी समाज से खुदीराम टुडू और राजवंशी समुदाय से आने वाले नीशीथ प्रमाणिक ने मंत्री के रूप में शपथ ली.
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207 सीटें जीतकर सत्ता में आयी भाजपा
बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में चुनाव हुए थे. 4 मई को जब नतीजे आये, तो भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस की 15 साल पुरानी सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया. ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गयी. भाजपा ने पहली बार 207 सीटें जीतकर दो तिहाई बहुमत के साथ सरकार का गठन किया है.
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