रात्रि प्रहरी के जिम्मे है चेहराकलां का प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय
चेहराकलां : प्रखंड मुख्यालय में स्थित प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय शोभा की वस्तु बन कर रह गया है. इसका कोई फायदा प्रखंड क्षेत्र के पशुपालकों को नहीं हो रहा है. यहां चिकित्सक आते ही नहीं हैं. कभी-कभार चिकित्सक नजर आते हैं, तो लोगों को आश्चर्य भी होता है. पशुपालक इससे वाकिफ हैं. इसलिए वह अपने […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
चेहराकलां : प्रखंड मुख्यालय में स्थित प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय शोभा की वस्तु बन कर रह गया है. इसका कोई फायदा प्रखंड क्षेत्र के पशुपालकों को नहीं हो रहा है. यहां चिकित्सक आते ही नहीं हैं. कभी-कभार चिकित्सक नजर आते हैं, तो लोगों को आश्चर्य भी होता है. पशुपालक इससे वाकिफ हैं. इसलिए वह अपने पशुओं के स्वास्थ्य की चिकित्सा निजी चिकित्सक से कराने को विवश हैं.
डॉक्टरों के नहीं रहने से ग्रामीणों को जहां ज्यादा पैसे देकर अपने पशुओं की चिकित्सा करानी पड़ रही है. वहीं दूसरी ओर खुले बाजार से ऊंची कीमत पर दवाएं भी खरीदनी पड़ती हैं. इस चिकित्सालय में पदस्थापित चिकित्सक के नहीं आने की शिकायत किसानों द्वारा करने की बात तो अलग है. चिकित्सालय में पदस्थापित रात्रि प्रहरी लाल धारी दांगी भी किसानों की शिकायत को जायज ठहराते हैं. चिकित्सालय की सारी जवाबदेही इन्हीं की होती है.
चिकित्सालय में अकेले रह रहे श्री दांगी ने बताया कि प्रभारी अक्सर हॉस्पिटल से गायब रहते हैं. वे आज कोर्ट में मामला है, तो कभी जिले में काम है, कह कर अस्पताल में नहीं आते हैं.
रात्रि प्रहरी ही पशुपालकों को देता है दवा : वर्ष 1996 से कार्यरत रात्रि प्रहरी ने बताया कि इस अस्पताल में ऐसा वर्षों से होता आ रहा है. उसने बताया कि यहां आनेवाले किसानों को उसके पशुओं के लक्षण के हिसाब से वह खुद कीड़ा और पेट खराब जैसी चुनिंदा बीमारियों की चिह्नित दवा दे देते है. यह भी बता दें कि यहां आनेवाले किसानों के नाम व पता ऑनलाइन करना होता है. इसके लिए एक ऑपरेटर की भी बहाली हुई है. लेकिन वे भी प्रतिदिन अस्पताल नहीं आकर तीन या चार दिनों के अंतराल पर आकर डाटा ऑनलाइन कर देते हैं. वरीय पदाधिकारी को इस समस्या से कोई सरोकार नहीं है.