हाजीपुर : आज जब देश की संसद बाबा साहेब की 125 वीं जयंती पर संविधान पर चर्चा कर उनके अधूरे कार्यों को पूरा करने का संकल्प ले रही है, तब जिला मुख्यालय में स्थापित उनकी एकमात्र प्रतिमा सही जगह पर स्थानांतरित होने के लिए प्रतीक्षा की बाट जोेह रही है. जिला मुख्यालय में हाजीपुर में […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
हाजीपुर : आज जब देश की संसद बाबा साहेब की 125 वीं जयंती पर संविधान पर चर्चा कर उनके अधूरे कार्यों को पूरा करने का संकल्प ले रही है, तब जिला मुख्यालय में स्थापित उनकी एकमात्र प्रतिमा सही जगह पर स्थानांतरित होने के लिए प्रतीक्षा की बाट जोेह रही है.
जिला मुख्यालय में हाजीपुर में किसी राष्ट्र निर्माता की प्रतिमा नहीं है, लेकिन उनके नामों पर चौक हैं जैसे गांधी चौक, राजेंद्र चौक, सुभाष चौक आदि. एक लंबे संघर्ष के बाद जिला मुख्यालय में स्थापित एक अदद बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की मूर्ति रामाशीष चौक पर निर्माणाधीन ओवर ब्रिज के नीचे आ गयी,
जिसे अस्थायी रूप से सड़क की बगल में लगाया गया है और इसे स्थायी रूप से स्थापित करने के लिए जिला प्रशासन कोई उपयुक्त जगह पिछले सात वर्षों में नहीं तलाश सका. फलत: बाबा साहेब की मूर्ति रामाशीष चौक पर उपेक्षित पड़ी है.
क्या है मामला: बाबा साहेब की मूर्ति को रामाशीष चौक से स्थानांतरित करने के लिए बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के नेता और बाबा साहब की जयंती और पुण्यतिथि आयोजन समिति केेे संयोजक घनश्याम कुमार दाहा समेत कई नेताओं ने जिला प्रशासन से बार-बार आग्रह किया, लेकिन जिला प्रशासन अब तक कोई उपयुक्त भूमि का तलाश नहीं कर सका.
खलती है दलित नेताओं और संगठनों की चुप्पी : आज जब दलितों को वोट बैंक के रूप में उपयोग करने के लिए समाज में ऐसे दर्जनों लोग हैं, जो अपने-आपको दलित नेता के रूप में स्थापित करना चाहते हैं और अपने आपको दलित हितों के रक्षक बताते हैं. वहीं जिले में दो विधायक, एक सांसद, आधा दर्जन प्रमुख, एक दर्जन जिला पार्षद सहित दर्जनों मुुुखिया और सरपंच इस समाज के हैं फिर भी किसी ने प्रतिमा की दुर्दशा पर कभी आवाज नहीं उठायी.
क्या है समाधान : जिला प्रशासन यदि चाहे तो इस मूर्ति को समाहरणालय परिसर में सभा कक्ष के निकट या जिला पर्षद के कार्यालय के सामने स्थित वाहन पड़ाव के निकट स्थापित कर सकता है. समाहरणालय परिसर में स्थापित हो जाने पर इसे बार-बार स्थानांतरित करने की समस्या भी समाप्त हो जायेगी तथा इसकी देखभाल भी अच्छी तरह हो सकेगी.
प्रतिमा से मिलेगी आनेवाली पीढ़ी को सीख : आनेवाली पीढ़ी अपने राष्ट्र निर्माताओं को जाने, इसके लिए आवश्यक है कि किसी जगह उनकी प्रतिमा रहे अन्यथा कुछ दिनों के बाद बच्चे उन्हें पहचान भी नहीं पायेंगे और उनके बारे में जान भी नहीं पायेंगे.