इसी साल दिसंबर माह तक सीवरेज का काम पूरा होने की बात कही गयी थी
हाजीपुर : शहर की सबसे बड़ी समस्या सीवरेज की है. शहर से जलनिकासी का मुकम्मल इंतजाम नहीं होने के कारण हर वर्ष शहर के अनेक हिस्से बरसात के पानी में डूबते हैं. इस समस्या को लेकर काफी हो-हल्ला के बाद केंद्र सरकार ने सीवरेज सिस्टम के लिए मास्टर प्लान की मंजूरी दी और फिर काम शुरू हुआ.
लेकिन दुर्भाग्य है कि चार साल हो गये और काम कभी रफ्तार नहीं पकड़ सका. अभी एक चौथाई काम भी पूरा नहीं हो सका है और लोगों को यह चिंता सता रही है कि यदि प्रगति की यही रफ्तार रही, तो इसके पूरा होने में 20 साल लग जायेंगे. इधर, नगर पर्षद भी कंपनी के काम पर असंतोष जता रही है. नगर पर्षद का कहना है कि उसे पता ही नहीं है कि काम कहां और कैसे हो रहा है. तब सवाल उठता है कि सीवरेज के काम में लगी कंपनी की प्रगति को कौन देखेगा.
हाजीपुर :बीत रहा है 2015 भी, लेकिन हाजीपुर शहर में सीवरेज निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना इस साल भी अधर में ही रह गयी. इसी दिसंबर तक काम पूरा होने की बात कही गयी थी. योजना की हालत देखने से पता चलता है कि इसमें शायद अभी कई साल और लग जायेंगे. तब तक के लिए नगरवासियों को खुले नाले से गुजरते गंदे पानी और जलजमाव की समस्या झेलती रहनी होगी. योजना के काम से निराश हैं नगरवासी, क्योंकि उनकी उम्मीदों पर इस साल भी पानी फिर गया है.
चार साल में चौथाई काम भी पूरा नहीं: शहर में सीवरेज निर्माण और ट्रीटमेंट प्लांट के प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुए चार साल हो गये. दो साल में यह योजना पूरी हो जानी थी. स्थिति यह है कि चार साल में 25 प्रतिशत काम भी नहीं हो पाया है. 12 अप्रैल, 2010 को इस प्रोजेक्ट को अनुमति मिली थी. नेशनल गंगा बेसिन ऑथोरिटी ने इसके लिए 113 करोड़ 62 लाख रुपये उपलब्ध कराये थे. 12 दिसंबर, 2011 को सीवरेज का निर्माण कार्य शुरू हुआ.
दिसंबर ,2013 तक इसे पूरा कर लेना था. शुरुआत में तो काम की रफ्तार ठीक रही, लेकिन उसके बाद चाहे जिस कारण से हो, काम शिथिल पड़ने लगा. इसे देखते हुए मार्च ,2015 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया. यह समय सीमा भी बीत गयी,लेकिन 20 प्रतिशत काम भी पूरा नहीं हो पाया. तब इसे दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य बना. यह समय भी बीत रहा है, लेकिन योजना का काम शहर में कहीं दिख नहीं रहा.
नगर पर्षद को नहीं मालूम कहां, कैसे हो रहा काम : नगर क्षेत्र में इतने बड़े प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है, लेकिन इसके कार्यों को लेकर नगर पर्षद भी अनभिज्ञ है. नगर पर्षद के अधिकारी कहते हैं कि इस काम पर पर्षद का कोई नियंत्रण नहीं है.
निर्माण एजेंसी द्वारा प्रोजेक्ट के काम के बारे में नगर पर्षद को कोई जानकारी भी नहीं दी जाती. नगर पर्षद सभापति हैदर अली कंपनी के काम के तरीके पर एतराज जताते हुए कहते हैं एग्रीमेंट के मुताबिक नगर पर्षद को सारे कार्यों की जानकारी देनी है. नगर पर्षद से एनओसी मिलने के बाद ही निर्माण एजेंसी को भुगतान होना है. पाइप लाइन बिछाने के लिए खोदे गये सड़क की मरम्मत करानी है.
एजेंसी द्वारा इन सारी चीजों की अनदेखी की जा रही है.चीन की कंपनी करा रही निर्माण कार्य : सीवरेज निर्माण का काम चीन की कंपनी एमएस ट्राइटेक के जिम्मे है. बिहार अर्बन इंफ्राक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड की देखरेख में एमएस इंडिया लिमिटेड को काम के सुपरविजन की जिम्मेवारी है. इस योजना के तहत 198 किलोमीटर के सीवर नेटवर्क में 11,382 मेनहोल तथा चार पंपिंग स्टेशन का निर्माण होना है. इसके अलावा लगभग 30 एकड़ में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण होना है. इस काम को पूरा करने के लिए निर्माण कंपनी ने शहर को पांच जोन में बांटा है. अभी तक एक जोन का काम भी पूरा नहीं हो सका है.
क्या कहते हैं अधिकारी
सीवरेज निर्माण के कार्य को लेकर कंपनी के विरुद्ध पहले भी सरकार के यहां शिकायत की गयी थी. न तो समयबद्ध तरीके से काम हो रहा है न तय मापदंडों का ख्याल रखा जा रहा है. नगर पर्षद के बोर्ड की बैठक में इस मसले पर चर्चा होगी और उसके बाद निर्माण एजेंसी के खिलाफ फिर सरकार को लिखा जायेगा.
हैदर अली, सभापति, नगर पर्षद
एक नजर में योजना
योजना की लागत- 113.62 करोड़ रुपये.
प्रारंभ होने का वर्ष-12 दिसंबर, 2011.
पूरा होने का लक्ष्य-माह दिसंबर 2013.
इस समय में काम-करीब 20 प्रतिशत.
निर्धारित लक्ष्य वृद्धि-माह मार्च, 2015.
समयवृद्धि पर काम-धीमी रही प्रगति.
पुन: समय विस्तार-माह दिसंबर,2015.
वर्तमान कार्य स्थिति-करीब 25 प्रतिशत.
