गोरौल : प्रखंड क्षेत्र के किसान गेहूं के खेती का उपयुक्त समय आ जाने के बावजूद प्रमाणित खाद-बीज नहीं मिलने को लेकर काफी चिंतित हैं. बाजार में सामान उपलब्ध रहने के बावजूद विश्वसनीयता को लेकर किसान परेशान हैं. खेतों में नमी की काफी कमी है, जिसके कारण खेतों में अंकुरण की कमी हो सकती है.
यदि अंकुरण कम हुआ तो किसानों के लिए यह एक गंभीर समस्या है. वहीं कृषि विभाग अपनी जवाबदेही निभाने में सक्षम नहीं हो पा रहा है. कहने को तो सरकार ने कृषि रोड मैप लागू किया था, पर इसका फायदा किसानों को नहीं मिल रहा है. दलहन, मक्का, चना, मसूर आदि का भी प्रमाणित बीज भी उपलब्ध नहीं है. तेलहन में सरसों और तोरी का भी यही हाल है.
रासायनिक खाद बाजारों में उपलब्ध है, पर वह ऊंची कीमत लेकर दी जा रही है. उस पर भी विश्वसनीयता का सवाल है. पैक्स द्वारा भी किसानों को रासायनिक खाद लगभग उपलब्ध नहीं करायी गयी है, जहां तक सिंचाई का सवाल है, तो प्रखंड क्षेत्र में दर्जनों राजकीय नलकूप हैं, लेकिन सब के सब बेकार हैं.
निजी नलकूपों से पानी निकालने के लिए डीजल सेट मशीन पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है. चूंकि प्रखंड क्षेत्र में बिजली की उपलब्धता न के बराबर होने के कारण बिजली चालित पंप सेट नहीं के बराबर हैं और डीजल पंप सेट पर लागत दर काफी बढ़ जाती है.
इन्हीं कारणों से किसान बोआई से पहले खेतों में पानी नहीं दे पाते हैं. जिन किसानों ने आगात बोआई की, उनके खेतों में अंकुरण की कमी देखी जा रही है. कुल मिला कर किसान दोहरे घाटे में दिख रहे हैं.
