सीमाचंल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त : एक मनहूस सुबह... तेज झटके के साथ घिसटने की आवाज

सुबह के लगभग चार बजे तेज झटका व जोरदार घिसटने की कर्कश आवाज के साथ ही अपनी सीट से नीचे गिरे रायगंज के जीवन मंडल को जब तक कुछ समझ में आता तब तक कई लोग चिल्लाते हुए दुर्घटना होने की बात कहने लगे. बांग्लाभाषी जीवन किसी तरह नीचे उतरे, धुआं-धूल के बीच वे आगे […]

सुबह के लगभग चार बजे तेज झटका व जोरदार घिसटने की कर्कश आवाज के साथ ही अपनी सीट से नीचे गिरे रायगंज के जीवन मंडल को जब तक कुछ समझ में आता तब तक कई लोग चिल्लाते हुए दुर्घटना होने की बात कहने लगे.
बांग्लाभाषी जीवन किसी तरह नीचे उतरे, धुआं-धूल के बीच वे आगे बढ़े. किसी तरह आगे आकर सहदेई बुजुर्ग स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर बैठे, वे बदहवास थे. कुछ भी सुनने-समझने के हालात में नहीं थे. वे अपने को टटोल भी नहीं पा रहे थे कि मैं जिंदा हूं. यह हादसा सहदेई बुजुर्ग स्टेशन के प्लेटफार्म से चंद मीटर पहले ही हुआ है.
(पत्रकार चंदन प्रभात खबर मधेपुरा से जुड़े हैं. वे इस घटना के गवाह बने. )
एस-7 में सफर कर रही बेगूसराय की मिंटू देवी ने बताया- सब कुछ दुःस्वप्न की तरह था. रिजर्वेशन कोच में सीट होने के बावजूद कुंभ में जा रहे यात्रियों की वजह से बाेगी खचाखच भरी हुई थी. लिहाजा मुझे भी केवल बैठने की जगह मिली. अचानक तेज झटके के साथ घिसटने की आवाज और फिर अफरा-तफरी. उस चंद मिनट में बाेगी से निकलने के बाद यह एहसास हुआ की जीवन ईश्वर की दुआ है.
देखते-देखते दो हिस्सों में बंट गयी ट्रेन: आनंद बिहार एक्सप्रेस में दुर्घटना के दौरान ट्रेन देखते ही देखते दो हिस्सों में बंट गयी. इंजन समेत दो जनरल बोगी 3 एसी बोगी व एक स्लीपर कोच धड़-धड़ आती हुई आगे बढ़ गयी, जबकि ट्रेन के पीछे लगा 2 एसी कोच एक जनरल व एक दिव्यांग तथा सामान के लिए कोच पूरी तरह पटरी से उतर कर उलटते हुए ट्रेन के साथ ही घिसकते रहे. कई मीटर बाद डब्बे के बीच लगा हिंज टूटने पर क्षतिग्रस्त डब्बे समेत आधा से अधिक ट्रेन की बोगियां पीछे छूट गयीं. सुबह 9:00 बजे तक स्थानीय लोगों के जबरदस्त सहयोग से फंसे लोगों को बाहर निकाला गया.
उसके बाद एसडीआरएफ समेत अन्य बचाव टीम भी मौके पर पहुंची. रेल प्रशासन व स्थानीय प्रशासन द्वारा पूर्ण रूपेण क्षतिग्रस्त 5 डिब्बों को अलग कर सीमांचल एक्सप्रेस को 10:00 बजे रवाना कर दिया गया. जिन डिब्बों को काटकर यात्रियों को निकाला जा रहा था, वहां लोगों की भीड़ जमी हुई थी. हादसे से आहत लोग डर और आशंका के बीच सफर कर रहे हैं. राहत की व्यवस्था नगण्य है. थोड़ा-बहुत पेयजल वितरण कर खानापूर्ति की गयी है. बोगी में केवल इसी की चर्चा है. बीच-बीच में मोबाइल की घंटी बजती है और लोग कुशल-क्षेम जान कर बात खत्म कर देते हैं.
नींद में थे यात्री, भरी थी खचाखच भीड़ : आनंद बिहार एक्सप्रेस/सीमांचल एक्सप्रेस में कुंभ के दौरान इलाहाबाद पहुंचकर मोनी अमावस्या में स्नान करने वालों की जबरदस्त भीड़ थी.
सीमांचल इलाकों से लेकर बंगाल एवं हर उस हिस्से जहां से इस ट्रेन का रूट है. लोग लगातार ट्रेन में चढ़ते रहे यही कारण है कि हर डिब्बे में नियत संख्या से अधिक सवारी सफर कर रही थी. रिजर्वेशन व एसी में भी लोग भरे हुए थे. लगभग 4:00 बजे रात की वजह से अधिकतर लोग नींद के आगोश में थे. इस बीच दुर्घटना ने लोगों को झकझोर दिया.

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