कृत्यानंद/रवि
हाजीपुर : जोगबनी-आनंद विहार सीमांचल एक्सप्रेस में यात्रियों की नींद रविवार की अहले सुबह जोरदार धमाके की आवाज व झटके साथ खुली. जब आंख खुली, तो यात्री अपने बेड से नीचे गिरे हुए थे.
एक के ऊपर एक कई यात्री दबे हुए थे. चारों ओर चीख-पुकार मची हुई थी. सारा सामान बिखरा पड़ा था. बाहर मौत का मंजर था. घूप अंधेरे की वजह से किसी को कुछ दिख नहीं रहा था. थोड़ा संभलने के बाद यात्री अपने परिजनों की खोजबीन करने लगे. हर ओर हाहाकार मचा हुआ था.
धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि एक किलोमीटर दूर तक के इलाके के लोगों को इसकी गूंज सुनायी पड़ी. हादसे की जानकारी होते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गये और लोगों को बोगी से निकालने में जुट गये. घटना की सूचना पर रेल अधिकारी के साथ-साथ डीएम-एसपी व अन्य पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे. लगभग तीन घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया. हालांकि उसके पहले ही ग्रामीण काफी संख्या में यात्रियों को बाहर निकाल चुके थे.
आंखों देखी : हादसे की कहानी, इनकी जुबानी
परिवार के साथ कुंभ स्नान के लिए जा रहा था. अहले सुबह तेज आवाज सुनायी पड़ी और जोर के झटके के साथ बोगी पलट गयी. सभी बेड से नीचे गिर पड़े. थोड़ा संभलने के बाद पत्नी व बहन की खोजबीन करने लगे. थोड़ी देर में सभी सही-सलामत मिले. हल्की चोटें आयी थीं.
सुबोध बसक राय, रायगंज राधिकापुर
सुबह में जोरदार धमाके की आवाज से अचानक आंखें खुलीं. जोर-जोर से बचाओ-बचाओ की आवाज आ रही थी. घर से बाहर निकता तो देखा कि लोग स्टेशन की ओर दौड़ रहे हैं. उनके साथ जब घटनास्थल पर पहुंचा तो देखा कि ट्रेन की बोगी पलटी हुई है.
दो दशक पूर्व भी सहदेई में हुआ था ट्रेन हादसा
हाजीपुर : दो दशक पूर्व वर्ष 1999 में एक पैसेंजर ट्रेन की तीन बोगियां दुर्घटनाग्रस्त हो गयी थीं. उस वक्त आधिकारिक रूप से तीन रेल यात्रियों के मरने की घोषणा की गयी थी. हालांकि उस वक्त ग्रामीणों ने काफी गंभीर आरोप भी लगाये थे. ग्रामीणों का आरोप था कि उस वक्त रात के अंधेरे की वजह से रेल प्रशासन ने आनन-फानन में सभी को वहां से हटा दिया था.
शायद यही वजह है कि रविवार को ट्रेन हादसे के वक्त से रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त होने तक हजारों की संख्या में ग्रामीण मौके पर डटे रहे. साथ ही यात्रियों की सेवाभाव में पूरी ईमानदारी से जुटे रहे. रविवार को हुई घटना मंे बोगियों के आपस में टकराने व पलटने की आवाज काफी दूर तक ग्रामीणों को सुनायी पड़ी थी. अंधेरा होने के बाद सहदेई समेत कई गांवों के लोग न सिर्फ घटनास्थल पर पहुंचे, बल्कि राहत कार्य में भी जुट गये.
ग्रामीणों ने सीढ़ी की सहायता से व बोगी की खिड़कियों को तोड़ कर फंसे सभी यात्रियों को बाहर निकाला. साथ ही उनके सामान, मोबाइल व अन्य सामान को भी निकाल कर उन्हें सौंपा. अधिकारियों के पहुंचने के पहले ही ग्रामीण डेढ़ सौ से ज्यादा रेलयात्रियों को बोगी के अंदर से बाहर निकाल चुके थे.
हिलने लगी ट्रेन, बोगी पर गिट्टी की बौछार
एसी बोगी के टीटीइ बोले
सीमांचल एक्सप्रेस में चार टीइइ अनिल कुमार, एमए खान, बिहारी चौधरी व जीके सिंह सवार थे़ दुर्घटनाग्रस्त बी- 3 एसी बोगी के टीइइ अनिल कुमार प्रथम घटना के बारे में बताते हुए सिहर जाते हैं. अनिल कहते हैं कि घटना से पहले सीट पर बैठ कर मैं मेमो बना किस पैसेंजर को कहां चढ़ना है और कहां उतरना है इसकी सूची तैयार कर रहा था़
इसके बाद जैसे ही खड़ा हुआ गाड़ी हिलने लगी़ जब तक मैं कुछ समझ पाता ट्रेन के पहिये ट्रैक से उतर चुके थे और गिट्टी उड़ने से तेज आवाज आने लगी़ इसके बाद बोगी पलट गयी़ यह कुशल संयोग था कि मैं बाल-बाल बच गया़ हादसे के बारे अनिल कहते हैं कि ट्रैक में गड़बड़ी के कारण ही दुर्घटना की आशंका है़ वैसे ठंड के दिनों में भी ट्रैक में गड़बड़ी की शिकायत आती है़ बोगी को जोड़नेवाले कलेंपू के टूटने के कारण क्षतिग्रस्त बोगी को छोड़ कर इंजन एक किलोमीटर तक अन्य बोगी को लेकर चल गया़
