Supaul News :वीरपुर, सुपौल में नगर पंचायत के वार्ड संख्या 03 स्थित कोसी कॉलोनी में करीब 33 लाख 95 हजार रुपये की लागत से बन रहे नाले को लेकर गुरुवार को विवाद खड़ा हो गया. राजू सिन्हा के घर से मुन्ना घोष के घर तक बनाये जा रहे नाले के निर्माण में स्थानीय लोगों ने अनियमितता का आरोप लगाते हुए विरोध जताया. लोगों का कहना है कि जिस नाले से इलाके में जलनिकासी की समस्या दूर होने की उम्मीद थी, उसके निर्माण में ही गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है.
निर्माण एजेंसी वारिस ट्रेडर्स पर स्थानीय लोगों ने सफेद बालू, खराब गुणवत्ता की गिट्टी और निम्न स्तर के सीमेंट के इस्तेमाल का आरोप लगाया. इतना ही नहीं, लोगों का दावा है कि नाले के बेसमेंट में निर्धारित आठ इंच की ढलाई के बजाय महज चार इंच ढलाई की जा रही है.
आरोपों के बाद निर्माण स्थल पर कुछ देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही. स्थानीय लोग काम बंद कराने की मांग पर अड़े रहे.
आठ इंच की जगह चार इंच ढलाई का आरोप
स्थानीय लोगों का सबसे गंभीर आरोप नाले की बेसमेंट ढलाई को लेकर है. उनका कहना है कि निर्माण में आठ इंच की ढलाई होनी चाहिए, लेकिन मौके पर केवल चार इंच ढलाई की जा रही है.
लोगों का सवाल है कि अगर निर्माण की शुरुआत में ही निर्धारित मानकों का पालन नहीं हुआ तो आने वाले समय में नाला कितने दिनों तक टिक पाएगा. उनका कहना है कि नाला बनने के बाद यदि निर्माण कमजोर होने के कारण टूटता या क्षतिग्रस्त होता है, तो इसका सीधा असर सरकारी राशि और इलाके की जलनिकासी व्यवस्था पर पड़ेगा.
स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है.
सफेद बालू और खराब गिट्टी इस्तेमाल करने का आरोप
विरोध कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि निर्माण शुरू होने के बाद से ही कार्यस्थल पर सफेद बालू, खराब गुणवत्ता वाली गिट्टी और निम्न मानक के सीमेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है.
हंगामे के बाद निर्माण स्थल से खराब ईंटों को जल्दबाजी में हटाये जाने का भी स्थानीय लोगों ने दावा किया. इससे लोगों का संदेह और बढ़ गया.
हालांकि, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर लगे आरोपों की आधिकारिक जांच अभी नहीं हुई है. इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि मौके पर इस्तेमाल की जा रही सामग्री वास्तव में निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं.
पहले से मौजूद नाले को तोड़कर शुरू हुआ निर्माण
स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस स्थान पर नया नाला बनाया जा रहा है, वहां पहले से नाला मौजूद था. पुराने नाले को हटाने के दौरान करीब 10 हजार ईंट और मिट्टी निकाली गयी थी.
लोगों ने आरोप लगाया कि पुराने नाले से निकली ईंट और मिट्टी को जेई ने बेच दिया. हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
यही वजह है कि स्थानीय लोग पूरे निर्माण कार्य की जांच की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि केवल नये निर्माण की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि पुराने नाले को हटाने के दौरान निकली सामग्री का हिसाब भी देखा जाना चाहिए.
शिलापट्ट को लेकर भी उठे सवाल
स्थानीय लोगों ने निर्माण स्थल पर लगे शिलापट्ट को लेकर भी सवाल उठाया है. उनका कहना है कि शिलापट्ट पर नाला निर्माण की दूरी और निर्धारित समय सीमा का उल्लेख नहीं किया गया है.
लोगों के मुताबिक, सार्वजनिक निर्माण कार्य में योजना से जुड़ी जरूरी जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि स्थानीय लोग भी काम की निगरानी कर सकें.
इसी दौरान स्थानीय लोगों ने कार्यस्थल पर मौजूद विभागीय जेई सत्यम राज से भी सवाल पूछे. लोगों का कहना है कि जेई ने उनकी आपत्तियों को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी.
लोगों का गुस्सा, बोले- मानक के अनुसार हो निर्माण
विरोध करने वालों में नसीम आलम, इंद्रभूषण कुमार, बबलू सिंह, अशोक कुमार, रोशन सिंह, संजीत सिन्हा, राकेश दास, संतोष हलवाई समेत कई स्थानीय लोग शामिल थे.
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें नाला निर्माण से कोई आपत्ति नहीं है. उनकी मांग केवल इतनी है कि करीब 34 लाख रुपये की लागत से बन रहे इस काम में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए.
लोगों के अनुसार, यदि नाला मजबूत और मानक के अनुरूप बनेगा तो इसका लाभ लंबे समय तक वार्ड के लोगों को मिलेगा. लेकिन निर्माण में अनियमितता हुई तो बारिश के दौरान जलजमाव की समस्या फिर से लोगों के सामने आ सकती है.
Supaul News: ईओ बोले- जांच में गड़बड़ी मिली तो रुकेगा काम
स्थानीय लोगों के विरोध और आरोपों पर नगर पंचायत के ईओ देवर्षि रंजन ने कहा कि लोग आक्रोशित हैं तो मामले की जांच करायी जाएगी.
उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यदि निर्माण कार्य में अनियमितता पायी जाती है तो काम बंद कराया जाएगा. साथ ही सिक्योरिटी डिपॉजिट की पांच प्रतिशत राशि की कटौती की जाएगी.
अब स्थानीय लोगों की नजर नगर पंचायत की जांच पर है. जांच में निर्माण सामग्री, ढलाई की मोटाई, पुराने नाले से निकली सामग्री और शिलापट्ट से जुड़े आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकती है.
करीब 33.95 लाख रुपये की लागत से हो रहे इस निर्माण कार्य में यदि तकनीकी मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय करना भी प्रशासन के सामने अहम चुनौती होगी. वहीं यदि आरोप सही नहीं पाए जाते हैं तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होने से लोगों के बीच बना संदेह भी दूर हो सकेगा.
