सुपौल पारा मेडिकल कॉलेज में तीन महीने से प्राचार्य नहीं, रोस्टर के बावजूद नहीं हो रही नियमित पढ़ाई

सुपौल पैरामेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक अव्यवस्था का आलम है. तीन महीने से प्राचार्य का पद खाली है, जिससे नियमित कक्षाएं और प्रशिक्षण प्रभावित हो रहा है. छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ मेस और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है.

Supaul Para Medical College: सुपौल. जिस कॉलेज में पढ़कर छात्र स्वास्थ्य क्षेत्र में अपना करियर बनाने की तैयारी कर रहे हैं, वहां पिछले करीब तीन महीने से नियमित प्राचार्य नहीं है. जिला मुख्यालय स्थित पारा मेडिकल कॉलेज की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर विद्यार्थियों की परेशानी अब पढ़ाई तक पहुंच गयी है. छात्रों का आरोप है कि रोस्टर तैयार होने के बावजूद नियमित कक्षाएं नहीं चल रही हैं और चिकित्सक भी तय कार्यक्रम के अनुसार पढ़ाने के लिए कॉलेज नहीं पहुंच रहे हैं.

पारा मेडिकल पाठ्यक्रम में सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी जरूरी माना जाता है. ऐसे में कक्षाओं के नियमित संचालन में समस्या आने से विद्यार्थियों को अपना पाठ्यक्रम पूरा होने और भविष्य की तैयारी को लेकर चिंता सताने लगी है. छात्रों का कहना है कि कॉलेज की व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ तो इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ेगा.

रोस्टर बना, लेकिन नियमित कक्षाएं नहीं चलने का आरोप

विद्यार्थियों के अनुसार कॉलेज में चिकित्सकों के पढ़ाने के लिए रोस्टर तैयार किया गया है. इसके बावजूद रोस्टर के अनुरूप कक्षाएं नियमित रूप से संचालित नहीं हो रही हैं.

छात्रों का कहना है कि पारा मेडिकल की पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं है. पाठ्यक्रम को समय पर पूरा करने के लिए नियमित सैद्धांतिक कक्षाओं के साथ जरूरी प्रशिक्षण भी होना चाहिए. कक्षाएं प्रभावित होने से विद्यार्थियों को विषयों की पढ़ाई पूरी करने और परीक्षा की तैयारी में परेशानी हो रही है.

कॉलेज प्रशासन से छात्रों ने मांग की है कि रोस्टर के अनुसार चिकित्सकों की उपस्थिति सुनिश्चित कर नियमित कक्षाएं संचालित करायी जाएं, ताकि पढ़ाई का नुकसान आगे न बढ़े.

प्राचार्य नहीं होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल

विद्यार्थियों का कहना है कि कॉलेज करीब तीन महीने से नियमित प्राचार्य के बिना चल रहा है. छात्रों के अनुसार इसका असर केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं है, बल्कि पठन-पाठन और कॉलेज की दूसरी व्यवस्थाओं पर भी दिखाई दे रहा है.

कॉलेज जैसे संस्थान में पढ़ाई, हॉस्टल, मेस और साफ-सफाई से जुड़ी व्यवस्थाओं के संचालन के लिए प्रशासनिक समन्वय जरूरी होता है. छात्रों का आरोप है कि मौजूदा स्थिति में उन्हें कई स्तरों पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

हालांकि, सिविल सर्जन ने बताया है कि कॉलेज की व्यवस्था को सुचारू करने के लिए डॉ नूतन वर्मा को प्रभारी प्राचार्य सह निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी नियुक्त किया गया है.

मेस नहीं, छात्र खुद बना रहे खाना

पढ़ाई के साथ हॉस्टल की व्यवस्था भी विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है. छात्रों का कहना है कि हॉस्टल में मेस की सुविधा उपलब्ध नहीं है. इसके कारण उन्हें खुद खाना बनाकर खाना पड़ रहा है.

बाहर से आने वाले या हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के साथ रोजाना भोजन की व्यवस्था करना अतिरिक्त परेशानी पैदा करता है. छात्रों का कहना है कि जब नियमित पढ़ाई भी प्रभावित हो रही हो और हॉस्टल की मूलभूत सुविधाएं भी पूरी तरह व्यवस्थित नहीं हों, तो उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं.

मेस की समस्या को लेकर सिविल सर्जन डॉ बाबू साहेब झा ने बताया कि हॉस्टल में मेस संचालन के लिए टेंडर निकाला गया है. यानी प्रशासन की ओर से इस व्यवस्था को शुरू कराने की प्रक्रिया चल रही है.

सफाई व्यवस्था को लेकर भी विद्यार्थियों की शिकायत

छात्रों ने कॉलेज और हॉस्टल परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था को लेकर भी शिकायत की है. उनका कहना है कि परिसर में समुचित सफाई नहीं होने से उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है.

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पाठ्यक्रम की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए साफ-सुथरा शैक्षणिक और आवासीय परिसर महत्वपूर्ण है. छात्रों का कहना है कि एक तरफ पढ़ाई नियमित नहीं हो रही और दूसरी तरफ मूलभूत सुविधाओं की समस्या बनी हुई है.

सिविल सर्जन ने बताया कि साफ-सफाई की व्यवस्था के लिए संबंधित एजेंसी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि कॉलेज की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है.

छात्रों का सवाल-ऐसे कैसे संवरेगा भविष्य?

कॉलेज की मौजूदा स्थिति को लेकर विद्यार्थियों का सबसे बड़ा सवाल उनकी पढ़ाई और भविष्य से जुड़ा है. छात्रों का कहना है कि यदि नियमित कक्षाएं नहीं चलेंगी और निर्धारित रोस्टर के अनुसार चिकित्सक पढ़ाने के लिए नहीं पहुंचेंगे, तो पाठ्यक्रम समय पर कैसे पूरा होगा.

विद्यार्थियों ने बताया कि समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गयी है. इसके बावजूद अब तक उन्हें अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दिया है. उनका कहना है कि पारा मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर करियर बनाने की उम्मीद लेकर वे यहां दाखिला लेते हैं. इसलिए कॉलेज में पढ़ाई और मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.

Supaul Para Medical College: सीएस बोले-व्यवस्था सुधारने की प्रक्रिया जारी

पूरे मामले पर सिविल सर्जन डॉ बाबू साहेब झा ने बताया कि कॉलेज की व्यवस्था को सुचारू करने की प्रक्रिया जारी है. उन्होंने कहा कि डॉ नूतन वर्मा को प्रभारी प्राचार्य सह निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी नियुक्त किया गया है.

पठन-पाठन के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों का रोस्टर तैयार कर दिया गया है. हॉस्टल में मेस संचालन के लिए टेंडर निकाला गया है और साफ-सफाई को लेकर संबंधित एजेंसी को आवश्यक निर्देश दिए गये हैं.

अब छात्रों की नजर इस बात पर है कि प्रशासनिक स्तर पर की जा रही इन कार्रवाइयों का असर कॉलेज की रोजमर्रा की व्यवस्था पर कब दिखाई देता है. विद्यार्थियों की मांग है कि नियमित कक्षाएं शुरू हों, चिकित्सक रोस्टर के अनुसार पढ़ाने पहुंचें और हॉस्टल की मूलभूत सुविधाएं जल्द व्यवस्थित हों, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो.

Also Read: बिहार में बाढ़ से 270 करोड़ की फसलें बर्बाद, जानिए कितना दिया जाएगा किसानों को अनुदान

Also Read: बिहार के शिक्षकों और कर्मचारियों को राहत, CM सम्राट चौधरी ने जारी किए 461 करोड़ रुपये

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Vikash Kumar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >