सुपौल में खुला कोसी का पहला निजी प्रोफेशनल कॉलेज

Supaul news: संस्थान को कोसी क्षेत्र का पहला निजी प्रोफेशनल कॉलेज माना जा रहा है, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी. दोनों पाठ्यक्रम आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना से संबद्ध होंगे.

Supaul news: सुपौल से राजीव झा की रिपोर्ट:

कोसी क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. सुपौल स्थित “राधेश्याम इंस्टिट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन” को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई), नई दिल्ली से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आधिकारिक स्वीकृति मिल गई है. इसके साथ ही संस्थान में बीबीए एवं बीसीए पाठ्यक्रमों में नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

संस्थान को कोसी क्षेत्र का पहला निजी प्रोफेशनल कॉलेज माना जा रहा है, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी. दोनों पाठ्यक्रम आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना से संबद्ध होंगे.

600 सीटों पर होगा नामांकन

एआईसीटीई द्वारा जारी स्वीकृति के अनुसार संस्थान में बीबीए की 300 एवं बीसीए की 300 सीटों पर नामांकन लिया जाएगा. कुल 600 सीटों वाले इस संस्थान का परिसर सुपौल जिले के सिसौनी रोड स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय के निकट स्थापित किया गया है.

संस्थान में आधुनिक शैक्षणिक वातावरण, तकनीकी सुविधाएं एवं प्रोफेशनल शिक्षा की व्यवस्था की गई है, जिससे कोसी क्षेत्र के विद्यार्थियों को अब उच्च शिक्षा के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा.

अब नहीं करना पड़ेगा पलायन

संस्थान के चेयरमैन डॉ. राधेश्याम यादव ने बताया कि कोसी क्षेत्र के हजारों छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पटना, दिल्ली, पुणे एवं बेंगलुरु जैसे शहरों में जाना पड़ता था. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह बड़ी चुनौती बन जाती थी.

उन्होंने कहा कि अब सुपौल में ही विद्यार्थियों को प्रबंधन एवं कंप्यूटर शिक्षा की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी. संस्थान का उद्देश्य ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करना है, ताकि वे राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें.

आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा संस्थान

डॉ. यादव ने बताया कि संस्थान में अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब, स्मार्ट क्लासरूम, समृद्ध पुस्तकालय एवं अनुभवी शिक्षकों की टीम उपलब्ध रहेगी. इसके अलावा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए करियर काउंसलिंग, सेमिनार, ट्रेनिंग एवं कौशल विकास कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे.

उन्होंने कहा कि संस्थान केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विद्यार्थियों को रोजगार एवं आत्मनिर्भरता के लिए भी तैयार करेगा.

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड से मिलेगी आर्थिक सहायता

संस्थान में नामांकन लेने वाले विद्यार्थियों को बिहार सरकार की बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 4 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी. इससे आर्थिक रूप से कमजोर एवं ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में बड़ी राहत मिलेगी.

संस्थान प्रबंधन के अनुसार इस योजना से जुड़ने के बाद छात्र बिना आर्थिक चिंता के बीबीए एवं बीसीए जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में नामांकन लेकर अपने भविष्य को नई दिशा दे सकेंगे.

कोसी क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक पहल

स्थानीय लोगों, शिक्षाविदों एवं अभिभावकों ने इस स्वीकृति को कोसी क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है. लोगों का मानना है कि आने वाले समय में यह संस्थान सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, अररिया एवं आसपास के जिलों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन सकता है.

कोसी क्षेत्र लंबे समय से तकनीकी एवं प्रोफेशनल संस्थानों की कमी से जूझता रहा है. ऐसे में “राधेश्याम इंस्टिट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन” की स्थापना क्षेत्र के शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। अपने समाचार पोर्टल पर कार्य करते हुए उन्होंने समाचार लेखन और डिजिटल कंटेंट निर्माण में अनुभव हासिल किया। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >