राजदीप को राज्य स्तर पर मिला छठा स्थान स्थान

आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी और राजदीप ने अपनी मेहनत से पूरे परिवार का नाम रोशन कर दिया

राघोपुर. मेहनत, लगन व दृढ़ संकल्प के आगे कोई भी बाधा टिक नहीं सकती, इस बात को सच कर दिखाया है रामविशनपुर पंचायत के वार्ड नंबर 10 हुसैनाबाद के एक साधारण परिवार से आने वाले होनहार छात्र राजदीप कुमार ने. राजदीप बिरेंद्र मंडल व माता रेणु देवी के पुत्र हैं. बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले राजदीप के पिता साइकिल रिपेयरिंग और पंचर बनाने की छोटी-सी दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं. आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी और राजदीप ने अपनी मेहनत से पूरे परिवार का नाम रोशन कर दिया. चार भाइयों में तीसरे स्थान पर रहने वाले राजदीप के सामने संसाधनों की कमी जरूर थी, लेकिन उनके हौसले कभी कम नहीं हुए. उनसे बड़े दो भाई और एक छोटा भाई है, जिनके बीच उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई. राजदीप ने खूबलाल उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय रामविशनपुर से पढ़ाई करते हुए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा जारी मैट्रिक परीक्षा परिणाम में 485 अंक प्राप्त कर पूरे बिहार में छठा स्थान हासिल किया है. यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है. राजदीप की इस सफलता के पीछे उनकी निरंतर मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण छिपा है. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और पढ़ाई को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया. राजदीप ने 97 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं. उन्होंने कुल 485 अंक प्राप्त किए, जिसमें गणित में 100 में 100 अंक लाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. इसके अलावा विज्ञान में 98, हिंदी और संस्कृत में 96-96 तथा सामाजिक विज्ञान में 95 अंक प्राप्त किए. 10 घंटे करता था पढ़ाई प्रभात खबर से खास बातचीत में राजदीप ने बताया कि वे गांव में रहकर ही रोजाना करीब 10 घंटे पढ़ाई करते थे. बताया कि वे गरीबी के कारण घर से ही पढ़ाई करते थे और अधिकतर सरकारी स्कूल से ही पढ़ाई करते थे. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों को दिया. उनका सपना आगे चलकर आईआईटी से इंजीनियरिंग करने का है, जिसके लिए वे कड़ी तैयारी करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि पढ़ाई में सोशल मीडिया उपयोग बहुत कम करते थे. बताया कि शुरुआत से ही मन लगाकर करते थे. वहीं राजदीप के पिता बिरेंद्र मंडल ने भावुक होते हुए कहा कि राजदीप बचपन से ही पढ़ाई में तेज था. कई बार उसे लगातार पढ़ते देख डर लगता था कि कहीं उसकी तबीयत खराब न हो जाए. उनकी आंखों में बेटे की सफलता की चमक साफ झलकती है. राजदीप की इस उपलब्धि से पूरे गांव में खुशी का माहौल है. हर कोई इस गरीब परिवार के होनहार बेटे की तारीफ कर रहा है. यह कहानी उन हजारों बच्चों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला रखते हैं.

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By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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