छातापुर प्रखंड क्षेत्र में बीते 20 मार्च की रात आये आंधी तूफान एवं ओलावृष्टि से प्रभावित हुए फसल क्षति का मुआवजा के लिए किसान टकटकी निगाह लगाये बैठे हैं. हैरानी है कि प्राकृतिक आपदा आये 10 दिन का वक्त गुजर गया है. लेकिन विभागीय पदाधिकारी अभी भी क्षति का आकलन जारी रहने की बात कर रहे हैं. 20 मार्च के एक सप्ताह बाद 27 मार्च की देर रात भी भारी ओलावृष्टि के साथ मूसलाधार बारिश हुई थी. इससे भी खेत में खड़े व गिरे फसल प्रभावित हुआ है. प्राकृतिक आपदा की लगातार पर रही मार से किसान हलकान हो रहे हैं. महंगी लागत वाले मक्का व गेहूं फसल की बर्बादी देख पीड़ित किसानों को आर्थिक विपन्नता की चिंता सता रही है. लेकिन कृषि विभाग पीड़ित किसानों को मुआवजा दिलाने में अपनी तत्परता नहीं दिखा रहा. हैरानी यह भी है कि कृषि विभाग एवं प्रखंड प्रशासन द्वारा जिला प्रशासन को अब तक फसल क्षति का आकलन प्रतिवेदन भी नहीं भेजा जा सका है. ऐसे में किसानों के प्रति सरकार की मंशा और प्रशासन के कर्तव्य दोनों पर सवाल उठने लगे हैं. छातापुर के किसान विर्तानंद ठाकुर, बबलु भगत, कटहरा के चंदन कुमार, प्रमोद कुमार, गुलशन कुमार, दिगंबर यादव, मो सनाहूल, बिजली सिंह, योगेंद्र यादव, झखाडगढ भट्टावारी के भवेश सिंह, सिकंदर सिंह, रामाशीष सिंह, अरविंद सिंह, कपिलदेव सिंह आदि ने बताया कि आंधी तूफान में बर्बाद हुआ फसल अभी भी खेत में पड़ा हुआ है. आपदा के कारण खेत में खड़े व गिरे फसल की गुणवत्ता एवं उपज पर बुरा असर पड़ना तय है. बावजूद इसके मुआवजा मिलना तो दूर अभी तक कृषि विभाग के कर्मी नुकसान का आकलन करने भी नहीं पहुंचे हैं. बेमौसम आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों के उम्मीद पर पानी फेर दिया है. पीड़ित किसानों के फसल का जल्द से जल्द आकलन हो और क्षति के आधार पर मुआवजा मिले सरकार से यह मांग करते हैं. कहते हैं प्रखंड कृषि पदाधिकारी इस बाबत बीइओ कुंदन कुमार ने बताया कि पंचायत स्तर पर फसल क्षति के आकलन का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है. उन्होंने खुद से 15 पंचायत का आकलन किया है. बलुआ भीमपुर तरफ फसल को कोई नुकसान नहीं है. सभी कृषि समन्वयक से रिपोर्ट प्राप्त कर प्रतिवेदन तैयार कर रहे हैं. बताया कि बीडीओ के द्वारा भी फसल क्षति का सर्वे कराने का निर्देश जिला प्रशासन ने दिया है. बीडीओ के द्वारा ही फसल क्षति का आकलन प्रतिवेदन जिला प्रशासन को भेजा जायेगा.
आंधी-बारिश से मक्का व गेहूं की फसल को हुआ व्यापक नुकसान, क्षति का आकलन नहीं होने से किसान परेशान
किसानों के प्रति सरकार की मंशा और प्रशासन के कर्तव्य दोनों पर सवाल उठने लगे हैं.
