सुशीला की मौत से गांव में छाया मातम

थाना क्षेत्र के मिश्रौली गांव में गांव में रिकवरी एजेंटों के प्रताड़ना से आहत महिला ने पंखे से लटकर आत्महत्या कर ली. महिला की मौत की सूचना के बाद परिजनों के करुण रूदन से माहौल गमगीन हो गया. ग्रामीणों का आरोप था कि कर्ज की मार और फाइनेंस कंपनी के एजेंटों की प्रताड़ना से आहत होकर मौत को गले गलाने के लिए मजबूर हो गई.

प्रतिनिधि,गुठनी. थाना क्षेत्र के मिश्रौली गांव में गांव में रिकवरी एजेंटों के प्रताड़ना से आहत महिला ने पंखे से लटकर आत्महत्या कर ली. महिला की मौत की सूचना के बाद परिजनों के करुण रूदन से माहौल गमगीन हो गया. ग्रामीणों का आरोप था कि कर्ज की मार और फाइनेंस कंपनी के एजेंटों की प्रताड़ना से आहत होकर मौत को गले गलाने के लिए मजबूर हो गई. वर्षों से दंपति व उसका परिवार आर्थिक तंगी का दौर से जूझ रहा था.ऐसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में दंपती निजी फाइनेंस कपंनियों से आसानी से मिलने वाले शॉर्ट टर्म लोन लेने के लिए तैयार हो गए. सरकारी लोन के तुलना में यह उन्हें आसानी से मिल गया था. बस यहीं से उनकी परेशानियां कम नहीं बल्कि, इतनी बढ़ गईं कि उन्हें मौत चुननी पड़ी. वहीं सूचना मिलने के बाद पीड़ित परिवार से क्षेत्रीय विधायक सत्यदेव राम, समाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि मिलने पहुंचे. इस दौरान घटना स्थल का भी उन्होंने मुआयना किया. पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे विधायक सत्यदेव राम ने कहा कि माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के अत्याचार से परेशान होकर सुशीला ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया. बिहार के गांव गांव में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का जाल फैला हुआ है और यह लोग गरीब दलित वंचित समाज की महिलाओं को अपने कर्ज के जाल में फंसा कर उनसे मोटा रकम सूद के रूप में वसूल करते हैं. कर्ज नहीं चुका पाने की स्थिति में गरीबों और वंचितों पर माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के लोग अत्याचार करते हैं उनका शोषण करते हैं उनके साथ अभद्रता करते हैं.सार्वजनिक रूप से बेइज्जत करते हैं. दंपती से 24.4 प्रतिशत तक वसूला जा रहा था ब्याज फाइनेंस कंपनी से मुकेश राम की पत्नी सुशीला देवी ने वर्ष 2024 में 65 हजार रुपये का शॉर्ट टर्म लोन लिया था. दंपती के परिजनों ने बताया कि सुशीला प्रतिमाह 2570 रुपये ब्याज जमा करती थी. ब्याज की वार्षिक दर 24.4 प्रतिशत थी. 36 किस्तों में कुल लगभग 97 हजार रुपये जमा किए जाने थे. 12 किस्त सुशीला जमा कर चुकी थीं.

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Author: DEEPAK MISHRA

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