Hindi Diwas 2026 : हिंदी दिवस के अवसर पर विद्या भवन महिला महाविद्यालय, सीवान में हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति जागरूकता, सम्मान और अनुराग पैदा करने के उद्देश्य से विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को हिंदी भाषा के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध साहित्यिक परंपरा और वर्तमान समय में इसकी उपयोगिता की जानकारी दी गयी. शिक्षकों ने भी विभिन्न विषयों के माध्यम से हिंदी भाषा के महत्व को समझाया.
प्राचार्य ने हिंदी के सम्मान और उत्थान पर रखे विचार
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सी.बी. सिंह ने की. उन्होंने हिंदी भाषा के सम्मान और उत्थान के लिए किये जाने वाले प्रयासों पर अपने विचार रखे. उन्होंने छात्राओं को हिंदी के भविष्य और भाषा के प्रति उनकी जिम्मेदारी से भी अवगत कराया. उन्होंने कहा कि हिंदी को केवल एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और सामाजिक जुड़ाव की भाषा के रूप में भी समझने की आवश्यकता है.
भारतेंदु की पंक्तियों से समझाया मातृभाषा का महत्व
कार्यक्रम का संयोजन हिंदी की सहायक प्राध्यापक डॉ. पूजा तिवारी ने किया. उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रसिद्ध पंक्तियों, "निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल. बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल." के माध्यम से मातृभाषा के महत्व को रेखांकित किया.
उन्होंने छात्राओं को भाषा की उत्पत्ति के इतिहास, भाषा परिवार तथा भाषा और बोली के बीच के अंतर की विस्तार से जानकारी दी. इसके साथ ही भाषा और संस्कृति के बीच के आपसी संबंध को भी स्पष्ट किया. उन्होंने बताया कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि किसी समाज की परंपरा, विचार और सांस्कृतिक पहचान को भी आगे बढ़ाने का माध्यम है.
अलग-अलग विषयों के शिक्षकों ने हिंदी की महत्ता बतायी
कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी भी उपस्थित रहे. राजनीति विज्ञान के सहायक प्राध्यापक जितेंद्र प्रसाद ने भाषा की महत्ता पर विचार रखे. मनोविज्ञान की सहायक प्राध्यापक डॉ. हुमा कमाल ने भाषा और मनोविज्ञान के बीच के संबंध पर प्रकाश डाला.
अंग्रेजी की सहायक प्राध्यापक डॉ. इरम अल्ताफ ने हिंदी के भाषा के रूप में महत्व को रेखांकित किया. अर्थशास्त्र के सहायक प्राध्यापक डॉ. धनेश राम ने अपनी लिखी कविता के माध्यम से भाषा के सम्मान का संदेश दिया.
गीत और कविता पाठ से छात्राओं को किया प्रेरित
संगीत की सहायक प्राध्यापक आराधना ने 'निर्माण के पावन युग में' गीत प्रस्तुत किया. अपनी प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने छात्राओं को हिंदी भाषा पर मजबूत पकड़ बनाये रखने का संदेश दिया. उर्दू की सहायक प्राध्यापक शमशुल आफरीन ने हिंदी कविता पाठ के माध्यम से भाषा की आवश्यकता और महत्ता पर प्रकाश डाला.
कार्यक्रम में छात्राओं ज्योति, ऋषा, शालू, अन्नी आदि ने भी कविता पाठ किया. छात्राओं ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से हिंदी भाषा के प्रति समर्पित रहने और इसके सम्मान को बनाये रखने का संदेश दिया.
हिंदी के संरक्षण और दैनिक प्रयोग पर जोर
कार्यक्रम के दौरान हिंदी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और दैनिक जीवन में इसके अधिकाधिक प्रयोग पर जोर दिया गया. शिक्षकों ने कहा कि भाषा के विकास के लिए नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी जरूरी है. कार्यक्रम ने छात्राओं को हिंदी के साहित्यिक और सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराने के साथ ही अपनी भाषा के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का भाव विकसित करने का संदेश दिया.
