तेज हवाओं ने बढ़ायी कनकनी, लोग घरों में दुबके

रविवार को न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 20 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया

सीवान. जिले में कड़ाके की ठंड और तेज़ कनकनी के चलते जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है. पिछले कुछ दिनों से तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोग ठिठुरने को मजबूर हैं. आसमान से गिर रही ओस की बूंदों ने सड़कों को भीगाकर फिसलन बढ़ा दी है. दोपहिया वाहन चालकों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

मौसम विभाग के अनुसार रविवार को न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 20 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. पछुआ हवा आठ से 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही है, जिससे ””चिल फैक्टर”” काफी बढ़ गया है.

ग्रामीण क्षेत्रों में ठंड की मार सबसे ज्यादा

ठंड का सबसे अधिक असर दैनिक मजदूरी करने वालों, रिक्शा चालकों और खुले आसमान के नीचे रात गुजारने वाले लोगों पर पड़ा है. ग्रामीण इलाकों में हालात और गंभीर हैं. गलन और कड़ाके की ठंड के कारण लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं. ठंड से बचने के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं.

चौक-चौराहों और सड़कों के किनारे लोग लकड़ी और कूड़ा-करकट जलाकर खुद को गर्म रखने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि स्थानीय लोगों में जिला प्रशासन के खिलाफ आक्रोश देखा जा रहा है. उनका कहना है कि प्रशासन द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है और गरीब व असहाय लोगों तक अभी तक सरकारी कंबल नहीं पहुंचे हैं.

अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ी

ठंड का असर बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर भी पड़ा है. अस्पतालों में सर्दी-खांसी और सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है. व्यापारिक गतिविधियां मंद पड़ गई हैं, क्योंकि लोग शाम होते ही घरों में कैद हो रहे हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही प्रमुख चौक-चौराहों पर अलाव और राहत सामग्री की व्यवस्था नहीं की, तो स्थिति और भयावह हो सकती है.

मौसम विशेषज्ञ की चेतावनी

मौसम विशेषज्ञ डॉ मनोज कुमार गिरी ने बताया कि जिले में पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव तेजी से बढ़ा है. इसी वजह से तापमान में गिरावट दर्ज की गई और पछुआ हवा की वजह से कनकनी में जबरदस्त इजाफा हुआ. डॉ गिरी ने कहा कि आने वाले एक सप्ताह तक ऐसे ही मौसम के हालात बने रहेंगे. सुबह में मध्यम कुहासा रहेगा और ठंड और बढ़ेगी.

जनजीवन पर कोल्ड डे का असर स्पष्ट दिखाई दे रहा है. लोग घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं, सड़कों पर वाहनों और राहगीरों की आवाजाही कम हो गई है और ठंड से बचाव के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं.

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