Siwan News (विवेक कुमार सिंह): सीवान जिले में खरीफ विपणन मौसम 2025-26 के तहत धान अधिप्राप्ति के बाद सीएमआर आपूर्ति में लापरवाही बरतने वाले पैक्सों के खिलाफ जिला सहकारिता विभाग ने सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है. जिला सहकारिता पदाधिकारी सौरभ कुमार ने पचरुखी प्रखंड के पचरुखी पैक्स, हरदिया पैक्स तथा सिसवन प्रखंड के कचनार पैक्स को एफआईआर पूर्व नोटिस जारी किया है. अधिकारियों ने इन समितियों को अविलंब लंबित सीएमआर आपूर्ति सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश दिया है.
हरदिया पैक्स में शून्य आपूर्ति, चार लॉट पूरा बकाया
विभागीय समीक्षा में पाया गया कि तीनों पैक्सों के जिम्मे कुल 314.982 मीट्रिक टन सीएमआर की आपूर्ति अब भी लंबित है. इसमें सबसे गंभीर स्थिति पचरुखी प्रखंड के हरदिया पैक्स की पाई गई है, जिसने अब तक एक भी लॉट सीएमआर राज्य खाद्य निगम को उपलब्ध नहीं कराया है. हरदिया पैक्स द्वारा 168.900 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई थी, जिसके विरुद्ध 114.852 मीट्रिक टन सीएमआर की आपूर्ति की जानी थी. लेकिन अब तक शून्य आपूर्ति होने के कारण पूरे चार लॉट सीएमआर की आपूर्ति रुकी हुई है.
पचरुखी और कचनार पैक्स पर भी लाखों का चावल बकाया
समीक्षा के अनुसार, पचरुखी पैक्स द्वारा 253.350 मीट्रिक टन धान की खरीद के विरुद्ध 172.278 मीट्रिक टन सीएमआर उपलब्ध कराया जाना था. इसमें से केवल 29 मीट्रिक टन सीएमआर की आपूर्ति की गई है, जबकि 143.278 मीट्रिक टन यानी पांच लॉट सीएमआर अब भी बकाया है. इसी प्रकार सिसवन प्रखंड के कचनार पैक्स द्वारा 168.900 मीट्रिक टन धान खरीद के विरुद्ध 114.852 मीट्रिक टन सीएमआर देना था, लेकिन अब तक 58 मीट्रिक टन सीएमआर ही उपलब्ध कराया गया है. यहां भी 56.852 मीट्रिक टन यानी दो लॉट सीएमआर की आपूर्ति शेष है.
एसटीआर जारी होने के बाद भी नियमों की अनदेखी
जिला सहकारिता पदाधिकारी ने बताया कि तीनों समितियों के लिए राज्य खाद्य निगम द्वारा एसटीआर पहले ही निर्गत किया जा चुका है. विभागीय निर्देश के अनुसार एसटीआर जारी होने के तीन दिनों के भीतर सीएमआर की आपूर्ति कर दी जानी चाहिए, लेकिन संबंधित समितियों द्वारा इस नियम का पालन नहीं किया गया है. जबकि विभाग द्वारा सीएमआर आपूर्ति की अंतिम तिथि 30 जून 2026 निर्धारित की गई है.
गबन की आशंका, पैक्स अध्यक्षों को अंतिम चेतावनी
विभाग द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि लंबे समय से सीएमआर आपूर्ति लंबित रहने के कारण अवशेष चावल के गबन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. इसके साथ ही विभागीय निर्देशों की अवहेलना तथा राज्य खाद्य निगम, जिला सहकारी बैंक और संबंधित राइस मिलरों को वित्तीय क्षति पहुंचाने की मंशा भी परिलक्षित हो रही है. इसे आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के उल्लंघन के रूप में भी देखा जा रहा है. डीसीओ ने तीनों पैक्सों के अध्यक्षों और प्रबंधकों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि वे अविलंब लंबित सीएमआर राज्य खाद्य निगम को उपलब्ध कराएं, अन्यथा उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने के साथ-साथ लंबित राशि की वसूली की कार्रवाई भी की जाएगी. इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित पैक्स प्रबंधन की होगी.
