Siwan News (सच्चिद्र द्विवेदी) : गर्मी के सितम जारी है.विगत चार दिनों से तापमान में बढ़ोतरी हो रही है. तीखी धूप और तेज गर्म हवा लोगों को परेशान कर रही है.बुधवार को अधिकतम तापमान 37 और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है.वही 11 किलोमीटर की रफ्तार से पछुआ हवा चली.मौसम के जानकारों का कहना है कि इस समय बेहद सावधानी बरतनी जरूरी है.थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है.खासकर बच्चें और बुजुर्ग को विशेष परहेज की जरूरत है.इस बार गर्मी शुरु होने के साथ मौसम ने रंग दिखाना शुरु कर दिया है. गर्म हवा के थपेड़े ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दिया है.दिन के 10 बजने के बाद ही गर्म हवा व तीखी धूप रफ्तार पकड़ ले रही है.मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष भीषण गर्मी और लू चलने का पूर्वानुमान है.दिन और महीने बढ़ने के साथ ही गर्मी और विकराल होती चली जाएगी.ऐसे में लोगों को सेहत के प्रति सतर्कता जरूरी है.
गर्मी से 10 दिनों तक नही मिलेगी राहत
मौसम विभाग की माने तो इस बार गर्मी पिछली रिकार्ड तोड़ने वाली है. इस साल तापमान में उतार चढ़ाव दिख रहा है.15 मई तक मौसम सामान्य था.दोपहर में उमस का अहसास था. वही सुबह शाम गर्मी सेवरहत मिली थी. मौसम के विशेषज्ञ डा. मनोज कुमार गिरी ने बताया कि आगामी दस दिन तक अधिकतम तापमान 39 से 42 और न्यूनतम तापमान 27 से 30 डिग्री सेल्सियस रहने का पूर्वानुमान है.आर्द्रता होने के चलते लोगों 45 से 50 डिग्री सेल्सियस की गर्मी महसूस होगी. मानसून के आगमन के बाद ही गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है.वही प्रत्येक दिन तेज गर्म हवा चलेगी.
भीषण गर्मी से स्वास्थ्य हो रहा प्रभावित
भीषण गर्मी का सीधा असर लोगों के शरीर पर पड़ रहा है. गर्मी बढ़ते ही अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा होने लगा है.मौसम में बदलाव के साथ ही उल्टी-दस्त,वायरल बुखारे व पेट दर्द की बीमारी ने दस्तक दे दी है.गर्मी से उल्टी-दस्त, पेट दर्द के साथ ही डायरिया ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं. चिकित्सकों की माने तो डायरिया एक जल जनित बीमारी है. गर्मी बढ़ते ही लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए कहीं से भी खरीदकर पानी पीना शुरू कर देते हैं. इसके अलावा टैंकरों व सप्लाई का पानी भी कई बार खराब आ जाता है.इसलिए लोगों को इस मौसम में हमेशा साफ पानी या पानी को उबाल कर ही पीना चाहिए.वही गर्मी का असर सबसे ज्यादा बच्चों पर पड़ रहा है. गर्मी के कारण उल्टी दस्त, बुखार, पेट में दर्द, सांस की बीमारी आदि रोग बच्चों में हो रहे हैं. ज्यादातर बच्चे उल्टी दस्त के अलावा वायरल फीवर से भी परेशान हो रहे हैं.रोजाना 8-10 बच्चे सरकारी अस्पताल में गर्मी से होने वाली बीमारी से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं. इसके अलावा प्राइवेट अस्पतालों में भी मरीज उपचार करा रहे हैं.
गर्मी लगने के लक्षण
अधिक गर्मी और शुष्क हवाओं को लू कहा जाता है.इनका तापमान सामान्य तापमान से अधिक होता है. तेज बुखार जिसमें शरीर का तापमान 104 डिग्री फारेनहाइट या इससे अधिक हो जाता है, थकान, कमजोरी, चक्कर आना, बेहोश होना, सिर में तेज दर्द होना, खूब पसीना आना, उल्टी होना, मांसपेशियों में ऐंठन एवं भ्रम पैदा होना,अत्यधिक गर्मी एवं पसीना आने से शरीर से नमक एवं पानी का तेजी से ह्रास होता है. अपर्याप्त मात्रा में पानी एवं नमक सेवन से डिहाइड्रेशन एवं हाइपोनेट्रेमिया (नमक की कमी) हो जाती है .जिससे शरीर में ऐंठन की शुरुआत होती है. शरीर का तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर यह कोशिका संरचना में क्षति करने लगता है.इससे किडनी एवं लीवर फेलियर के साथ श्वसन एवं स्नायु संबंधित समस्याएं शुरू होती है एवं सही समय पर इलाज के अभाव में यह जानलेवा हो जाता है.
डॉक्टरों ने बच्चों और बुजुर्गों को सतर्क रहने की दी सलाह
चिकित्सकों का कहना है कि गर्मियों के मौसम में गरम गरम हवाओं के थपेड़े चलने शुरू हो जाते हैं व शरीर में पानी और नमक की कमी होनें लगती है जिससे लू लगने का खतरा बढ़ जाता है . अक्सर गर्मियों के मौसम में जिन लोगों के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है शरीर कमजोर होता है जैसे बच्चों व बुजुर्गों को लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है या जो लोग ज्यादा कसरत करते हैं उनके शरीर में भी पानी व नमक की मात्रा कम होंने से भी लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है . खानपान व दिनचर्या में बदलाव करके इस समस्या से बचा जा सकता है.
Also Read : Siwan News : दया, करुणा और परोपकार ही मानव जीवन के सबसे बड़े आभूषण है : प्रमोद कृष्ण महाराज
